नागपुर-वाराणसी सीधी ट्रेन की मांग तेज, 35 हजार लोगों की अपील; महिलाओं की परेशानी को लेकर रेल मंत्री से गुहार
Women Travel Issues Railway: नागपुर-वाराणसी सीधी ट्रेन की मांग फिर हुई तेज। कहार समाज ने रेल मंत्री से महिलाओं व उत्तर भारतीय परिवारों की यात्रा समस्याओं को देखते हुए नई ट्रेन शुरू करने की अपील की है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर वाराणसी सीधी ट्रेन मांग,(सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur Varanasi Direct Train Demand: नागपुर से वाराणसी के लिए सीधी ट्रेन शुरू करने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इस मुद्दे को लेकर कहार समाज उत्कर्ष संस्था नागपुर की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए कोषाध्यक्ष बबीता नायक ने उत्तर भारत के अपने पैतृक घर जाने वाली महिलाओं की समस्यों को उजागर करते हुए रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव से मांग कि रेलवे को नागपुर से वाराणसी या उत्तर भारत जाने वाली महिलाओं की परेशानियों को समझना चाहिए।
35,000 लोगों की अपील सोंधिया, नायक समाज के अध्यक्ष कमलेश सौंधिया और सचिव अशोक नायक ने एक स्वर में कहा कि वर्ष 1950 में उन्नाव, यूपी से 150 परिवार नागपुर आये थे और यहीं बस गये।
आज कहार, भोई, निषाद और तत्सम समाज बंधुओं की संख्या 35,000 से अधिक है। ये सभी अपने पैतृक स्थान से जुड़ने के लिए तरसते हैं लेकिन सीधी ट्रेन सेवा नहीं होने के चलते उन्हें भारी परेशानियों की सामना करना पड़ता है।
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जिस प्रकार एक ट्रेन में एसी, स्लीपर और जनरल कोच होते हैं। उसी प्रकार हर समाज में भी ऐसे लोग होते हैं जो अपनी कार वहन नहीं कर सकते। उनके लिए अपने घर आने और जाने के लिए ट्रेनों जैसे सस्ते और सुरक्षित साधन पर निर्भर रहना पड़ता है।
हम अपने समाज के 35,000 समाज बंधुओं की ओर से रेल मंत्री वैष्णव से नागपुर और वाराणसी के बीच सीधी ट्रेन की मांग करते हैं। जल्द ही केन्द्रीय मंत्री गडकरी से मिलकर भी अपनी मांग को मजबूती से उनके समक्ष रखेंगे।
बेहद दूभर, शौचालय तक नहीं मिलते
नायक ने कहा कि दोनों शहर अपने अपने स्तर पर देश में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इसके बावजूद आज भी इन शहरों के लिए सीधी ट्रेन सुविधा उपलब्ध नहीं है।
इससे यात्रियों विशेषकर महिलाओं को लंबी दूरी तय करने के लिए बस या बार-बार ट्रेन बदलने जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
बस से यात्रा करना महिलाओं के लिए बेहद दूभर साबित होता है। नागपुर से वाराणसी के सफर में 16 से 20 घंटे
लग जाते हैं।
लंबी दूरी की बसों में न तो पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होती है और न ही शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं।
कई बार रातभर का सफर करना पड़ता है जहां महिलाओं को असुरक्षा और असहज माहौल का सामना करना पड़ता है।
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छोटे-छोटे स्टॉप पर बस रुकने के दौरान स्वच्छ शौचालय की सुविधा नहीं मिलती जिससे उन्हें अत्यधिक परेशानी होती है।
परिवार के साथ यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। बच्चों और बुजुर्गों के साथ लंबी बस यात्रा में थकान, असुविधा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
वहीं ट्रेन यात्रा अपेक्षाकृत सुरक्षित, आरामदायक और सुविधाजनक मानी जाती है, लेकिन सीधी ट्रेन न होने के कारण उन्हें मजबूरी में बस या कई ट्रेनों का सहारा लेना पड़ता है।
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्री वैष्णव द्वारा इस रूट पर जल्द से जल्द सीधी ट्रेन शुरू करनी चाहिए।
