नागपुर दीक्षाभूमि अपडेट: भंते ससाई की छुट्टी, ट्रस्टी विलास गजघाटे संभालेंगे स्मारक समिति की कमान
Nagpur Deekshabhoomi Memorial: नागपुर की दीक्षाभूमि स्मारक समिति ने भंते सुरेई ससाई को अध्यक्ष पद और समिति से हटा दिया है। उनकी जगह विलास गजघाटे को सर्वसम्मति से नया अध्यक्ष चुना गया।
- Written By: अंकिता पटेल
भंते सुरेई ससाई, विलास गजघाटे, स्मारक समिति, नागपुर,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Memorial Committee: नागपुर भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के धम्मचक्र प्रवर्तन से पावन हुई पवित्र दीक्षाभूमि में विवाद अब चरम पर पहुंच गया है। स्मारक समिति के अध्यक्ष और धम्मसेनापति भंते सुरेई ससाई को उनके पद से हटा दिया गया है और उनके स्थान पर ट्रस्टी विलास गजघाटे को सर्वसम्मति से नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। भंते ससाई को न केवल अध्यक्ष पद बल्की समिति से ही हटाया गया है। दीक्षाभूमि में स्मारक समिति के 11 में से 8 सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई।
धर्मादाय उपायुक्त द्वारा 20 फरवरी और 12 मई 2026 को दिए गए आदेशों के तहत यह बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में डॉ. कमल गवई, डॉ. राजेंद्र गवई, एनआर सुटे, विलास गजघाटे, डॉ. डीबी दाभाडे, डॉ. प्रदीप आगलावे और भंते नागदीपंकर उपस्थित थे, जबकि भंते ससाई, सुधीर फुलझेले और एडवोकेट आनंद फुलझेले इस बैठक में अनुपस्थित रहे।
कानूनी रूप से हुई प्रक्रिया
समिति के सचिव डॉ. राजेंद्र गवई ने दावा किया कि बदलाव की यह प्रक्रिया बहुमत के आधार पर और पूरी तरह से कानूनी रूप से की गई है। बैठक में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों की विरासत को संजोने, दीक्षाभूमि की गरिमा व पवित्रता बनाए रखने और संस्था के प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह व कानून के दायरे में चलाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
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भंते ससाई पर मनमानी का आरोप
डॉ. राजेंद्र गवई ने स्पष्ट किया कि भंते ससाई आज भी सभी के लिए आदरणीय हैं और उनके साथ कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है। हालांकि उनका ‘एकतरफा कामकाज’, ‘अनियमितताएं और सामूहिक निर्णय लेने की इच्छा न होने के कारण मजबूरी में उन्हें पद से हटाया जा रहा है।
समिति ने एक शर्त भी रखी है कि यदि भंते ससाई अगले 24 घंटों के भीतर समिति के अन्य सदस्यों के साथ अध्यक्ष पद पर बने रहने की इच्छा व्यक्त करते हैं तो उन्हें गजघाटे को सचिव नियुक्त करने की शर्त स्वीकार करनी होगी।
कॉलेज में नियुक्तियों और ऑडिट में भ्रष्टाचार के आरोप
डॉ. राजेंद्र गवई ने घोषणा की है कि भंते ससाई के कार्यकाल में डॉ. आंबेडकर कॉलेज में हुई नियुक्तियों की जांच की जाएगी क्योंकि इनमें भ्रष्टाचार, गड़बड़ी और अनियमितता की आशंका है। उन्होंने भंते के सहयोगी रवि मेढे और अन्य लोगों पर कॉलेज तथा स्मारक समिति के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप करने का गंभीर आरोप भी लगाया। इसके अलावा डॉ. गवई ने यह भी दावा किया कि पिछले 3 वर्षों के ऑडिट रिपोर्ट में भी अनियमितताएं पाई गई हैं।
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असंवैधानिक है पूरी प्रक्रिया : भंते ससाई
दूसरी ओर, भंते ससाई ने इस पूरी बैठक को ही असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने डॉ. राजेंद्र गवई की सचिव के रूप में नियुक्ति को अमान्य कर दिया और दावा किया कि शेष 3 सदस्यों का नाम अभी तक धर्मादाय आयुक्तालय की ‘चेंज रिपोर्ट’ में दर्ज नहीं हुआ है। इस पूरे विवाद के संबंध में भंते ससाई ने रविवार को ही पुलिस आयुक्तालय में शिकायत दर्ज करा दी थी। इसके जवाब में डॉ. गवई ने दावा किया है कि उन्हें न्यायालय ने ही सचिव के रूप में मान्यता दी है।
