

Nagpur Mankapur Mental Hospital: गिरफ्तारी के बाद यदि आरोपी की मानसिक स्थिति को लेकर सवाल उठता है तो केवल अदालत में उसके व्यवहार के आधार पर यह तय नहीं किया जाता कि वह मानसिक रूप से बीमार है या नहीं।
ऐसे मामलों में अदालत के आदेश पर आरोपी को मानसिक स्वास्थ्य के मूल्यांकन के लिए प्रादेशिक मनोरोग अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। मानकापुर स्थित प्रादेशिक मनोरुग्णालय में विभिन्न प्रकार के अपराधों के आरोपियों को मानसिक स्वास्थ्य के मूल्यांकन के लिए भर्ती किया जाता है।
इनमें चोरी से लेकर हत्या, हत्या के प्रयास और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों के आरोपी भी शामिल हैं। फिलहाल गंभीर अपराधों के 4 आरोपियों को उपचार के लिए भर्ती होने की जानकारी नागपुर जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.अमरीश मोहबे ने दी।
कई बार आरोपी अदालत में असामान्य व्यवहार करता दिखाई देता है। सवालों का जवाब नहीं देना, तेज आवाज में बोलना या चिल्लाना, खुद से बात करना अथवा बातचीत से बचना जैसी स्थितियों से मानसिक बीमारी का संदेह पैदा हो सकता है।
हालांकि केवल इस तरह के व्यवहार को मानसिक बीमारी का चिकित्सकीय प्रमाण नहीं माना जा सकता। अपराध के बाद पैदा हुआ तनाव, डर, परिस्थितिजन्य मानसिक दबाव या अन्य कारणों से भी व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव आ सकता है।
आरोपी के मानसिक बीमारी का दावा करने मात्र से उसे सही या गलत नहीं माना जाता। प्रत्येक मामले का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन किया जाता है। बीमारी के लक्षण, उनकी अवधि, पूर्व मेडिकल हिस्ट्री और आरोपी के लगातार व्यवहार को एक साथ देखा जाता है।
मानसिक स्थिति के मूल्यांकन के बाद मेंटल हेल्थ रिव्यू बोर्ड (एमएचआरबी) की प्रक्रिया के तहत आगे का निर्णय लिया जाता है। इसके आधार पर न्यायालयीन प्रक्रिया में संबंधित आरोपी के संबंध में आगे की कार्रवाई होती है।
रोहित खोडे नवभारत