पैसे दो…पैसे दो…देवाभाऊ पैसे दो…, ठेकेदारों का सरकार के खिलाफ भीख मांगो आंदोलन
Nagpur News: बकाया भुगतान न मिलने से नाराज ठेकेदारों ने अनोखे अंदाज में विरोध जताया। उन्होंने सड़कों पर भीख मांगकर 2,140 रुपये इकट्ठा किए और यह रकम सरकार के नाम जमा की।
- Written By: सोनाली चावरे
संविधान चौक पर भीख मांगो आंदोलन (pic credit; social media)
Maharashtra News: बीते एक वर्ष से राज्य के विविध सरकारी विभागों में किए गए कार्यों के प्रलंबित 89,000 करोड़ रुपयों के बिलों के भुगतान की मांग को लेकर विदर्भभर के ठेकेदारों ने संविधान चौक पर भीख मांगो आंदोलन किया। पूरे विदर्भभर से 29 संगठनों के ठेकेदारों ने विदर्भ कांट्रेक्टर एसोसिएशन के बैनर तले काले शर्ट पहनकर और हाथ में काले झंडे लहराते हुए सरकार का निषेध किया। सरकार के लिए भीख मांगकर 2,140 रुपये जमा किये।
इस रकम का डीडी बनाकर सरकार को भेजा जाएगा। संतप्त ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर जाने का प्रयास किया। लेकिन डीसीपी ट्रैफिक ऑफिस के पास पुलिस ने उन्हें रोक दिया। उसके बाद सीएम की सहसचिव आशा पठान को मांगों का आवेदन सौंपा गया।
आंदोलनकारियों ने ‘पैसे दो…पैसे दो…देवाभाऊ पैसे दो’ के नारे लगाए। संगठन के अध्यक्ष नितिन डहाके ने कहा कि विविध विभागों में 89,000 करोड़ रुपयों का भुगतान 1 वर्ष से नहीं किया गया है।
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सीएम व दोनों डीसीएम को कई बार पत्र भी लिखा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मुंबई में भी आंदोलन किया गया लेकिन केवल कोरा आश्वासन ही मिला।
तो तीव्र होगा आंदोलन
आंदोलनकारियों ने कहा कि बिलों का भुगतान नहीं होने से ठेकेदारों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अनेक को तो परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। इससे त्रस्त होकर सांगली के ठेकेदार अभियंता हर्षल पाटिल ने सुसाइड तक कर लिया।
वर्धा के बाबा जाकिर ने अपने शरीर पर पेट्रोल डालकर आत्महत्या करने का प्रयास किया लेकिन सौभाग्य से अनर्थ टल गया। आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक ठेकेदारों की पीठ पर हाथ रखती है। लेकिन सुशिक्षित ठेकेदारों को डेढ़ से 2 करोड़ तक का काम ही दिया जाता है और काम पूर्ण होने के बाद भी बिल का भुगतान नहीं करती।
आंदोलन में विविध संगठनों के प्रतिनिधि संजय मैद, नितिन सालवे, दीपेश कोलुरवर, गोविंद डेहनकर, सुबोध सरोदे, संदीप कोठारी, किशोर मिटकरी, प्रवीण उंबरकर, अजय तुम्मावार, गजानन लाकडे, सुरेश चकोले, विजय अग्रवाल, बंडूभाऊ देशमुख, अनिल मानापुरे, शकीर अब्बास अली, विजय नायडू, रोशन खोब्रागडे सहित पूरे विदर्भ से आए ठेकेदार बड़ी संख्या में शामिल हुए।
आंदोलनकारियों ने कहा कि विधायक, मंत्री, सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों के वेतन नियमित दिए जा रहे हैं। बैंक आदि से कर्ज लेकर काम करने वाले ठेकेदारों के बिल साल-सालभर तक लटकाया जा रहा है।
इन विभागों में लटके हैं बिल
- पीडब्ल्यूडी- ४०,000 करोड़
- जलजीवन मिशन- 12,000 करोड़
- ग्राम विकास विभाग – ६,000 करोड़
- जल संधारण व जल संपदा विभाग- 10,000 करोड़
- नगर विकास अंतर्गत विशेष डीपीडीसी फंड, ग्रामीण सुधार विभाग- १८,000 करोड़
विराआंस ने किया समर्थन
ठेकेदारों के आंदोलन को विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने समर्थन दिया है। शहर अध्यक्ष मुकेश मासुरकर ने कहा कि जिस तरह किसानों को आत्महत्या करने को यह सरकार मजबूर कर रही है वैसा ही हाल ठेकेदारों का कर दिया है।
आंदोलनों को देखते हुए सरकार ने ठेकेदारों का 2,900 करोड़ रुपयों का भुगतान करने की घोषणा की है जो बकाया बिल का 5 फीसदी भी नहीं है। समिति पदाधिकारियों सुनील चोखारे, नरेश निमजे, बाबा शेलके, रवींद्र भामोडे ने आंदोलन स्थल पर जाकर समर्थन पत्र दिया।
