नागपुर: कोयला घोटाले में CBI की एफआईआर, वेस्ट कोयले के खेल में घिरे रेलवे अधिकारी
Nagpur CBI Coal Scam Probe: नागपुर CBI ने डुमरी खुर्द रेलवे साइडिंग कोयला घोटाले में निजी कंपनी व अज्ञात रेलवे अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, सीबीआई, कोयला घोटाला (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो )
Nagpur SECR Coal Scam Investigation: नागपुर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की नागपुर शाखा ने डुमरी खुर्द रेलवे साइडिंग में हुए कोयला घोटाले में बड़ा खुलासा करते हुए निजी फर्म सहित अज्ञात लोकसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार प्रतिबंधक कानून के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच में सामने आया कि दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे (एसईसीआर) के अधिकारियों और निजी कंपनी की मिलीभगत से वेस्ट व रिजेक्ट कोयले के नाम पर उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को खुले बाजार में बेचने का मामला सामने आया है।
आरोपियों में हलदिया, पश्चिम बंगाल की मेसर्स एसजे इंटरप्राइजेस, संचालक अमित मैती और रेलवे अधिकारियों का समावेश है। फिलहाल सीबीआई ने एसईसीआर के अधिकारियों के नामों का खुलासा नहीं किया है लेकिन माना जा रहा है कि उच्च स्तर के अधिकारी इस मामले में नपने वाले हैं क्योंकि सारी हेराफेरी रेलवे अधिकारियों की मिलीभगत से ही की गई थी।
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डुमरी खुर्द रेलवे साइडिंग में करोड़ों के कोयला घोटाले का खुलासा
सीबीआई को जानकारी मिली थी कि डुमरी खुर्द रेलवे साइडिंग में 2 अलग-अलग कंपनियां मेसर्स एसजे एंटरप्राइजेस और मेसर्स चड्डा ट्रेडिंग कंपनी वैगन और ट्रैक क्लीनिंग तथा कोयला संभालने के कार्य में लगी हुई थीं।
आरोप है कि एसजे एंटरप्राइजेस ने रिजेक्ट अथवा वेस्ट मटेरियल बताकर रेलवे परिसर और वैगनों से कोयला एकत्रित किया और बाद में उसे खुले बाजार में बेच दिया जिससे वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) को आर्थिक नुकसान हुआ।
सीबीआई, दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे (एसईसीआर) के विजिलेन्स विभाग और वेकोलि के अधिकारियों ने विगत 21 मई को डुमरी खुर्द रेलवे साइडिंग पर संयुक्त जांच की। निरीक्षण के दौरान रेलवे परिसर में 1,427 मीट्रिक टन कोयला जमा पाया गया। इसके नमूने लेकर सीएसआईआर और सीआईएमएफआर प्रयोगशाला में भेजे गए। दोनों की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि यह कोयला जी-12 ग्रेड का है जो व्यावसायिक रूप से मूल्यवान कोयला माना जाता है।
फर्जी गेट पास जारी कर बेचा गया कोयला
वहीं डुमरी खुर्द रेलवे स्टेशन पर तैनात कुछ अधिकारियों ने एसजे एंटरप्राइजेस के साथ मिलीभगत करके 21 और 24 मार्च 2026 को कुल 18 गेट पास जारी किए। इन गेट पास के जरिए कंपनी ने 720 मीट्रिक टन जी 12 ग्रेड कोयला रेलवे परिसर से उठाकर बाजार में बेच दिया।
कंपनी को केवल रेलवे साइडिंग परिसर में रिजेक्ट अथवा वेस्ट मटेरियल हटाने की अनुमति थी, जबकि डब्ल्यूसीएल की लीज वाली साइडिंग से कोयला हटाने का अधिकार नहीं था। इसके बावजूद कोयले की निकासी की गई।
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जांच में सामने आया कि जी-12 ग्रेड कोयले की बाजार कीमत करीब 4,000 से 4,200 रुपये प्रति टन है। 720 मीट्रिक टन कोयले की हेराफेरी से एसजे एंटरप्राइजेस को करीब 28.80 लाख रुपये का लाभ हुआ, जबकि डब्ल्यूसीएल को उतने ही मूल्य का नुकसान उठाना पड़ा।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि गैर-कोकिंग कोयले के परिवहन के दौरान रिजेक्ट या वेस्ट मटेरियल उत्पन्न नहीं होता, इसलिए गेट पास में कोयले को वेस्ट मटेरियल बताया गया। डीआईजी ऋषिकेश सोनवने के मार्गदर्शन में डीवाईएसपी नीरजकुमार गुप्ता प्रकरण की जांच कर रहे हैं।
