ब्रम्हपुरी में रेत का 'महा-घोटाला': दागी कारोबारी अग्रवाल ने सरकार को लगाया ₹24 करोड़ का चूना, सिस्टम मौन!

Brahmapuri Sand Mining Scam: ठेका खत्म होने के बाद भी 24 करोड़ की अवैध खुदाई। जिला खनिज अधिकारी पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप। मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत।
A massive ₹24 Cr sand mining scam surfaces in Brahmapuri, Chandrapur.
रेत तस्करी मामला (फाइल फोटो)
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Illegal Sand Excavation Maharashtra: भंडारा में महाराष्ट्र सरकार को ७० करोड़ से ज्यादा का चूना लगाने वाले दागी रेत कारोबारी द्वारा चंद्रपुर जिले की ब्रम्हपुरी तहसील में भी २४ करोड़ रुपये का चूना लगाए जाने की सनसनीखेज जानकारी मिली। यह मामला कारोबारी का हौसला दर्शाने के साथ-साथ यह भी दिखाता है कि जब वरिष्ठ अधिकारी ही नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हों तो मंत्री और सरकार कितनी पारदर्शिता का आश्वासन दें? लेकिन होता वही जो अफसरशाही चाहती है।

सीएम को भेजी शिकायत में गंभीर खुलासा

मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को भेजी गई शिकायत में गंभीर खुलासा किया गया है। ब्रम्हपुरी सहित चंद्रपुर जिले के रेत घाटों में अवैध खुदाई तो सर्वदलीय मित्रता के हिसाब से चल रही है लेकिन अनोज अग्रवाल वाला मामला बहुत ही अलग है। अग्रवाल को मिला ठेका 30 सितंबर को खत्म हो गया था। उसके बाद वहां रेत की खुदाई बंद हो जानी चाहिए थे। इसके बाद जिला खनिज अधिकारी रोहन ठवरे ने बगैर कोई अधिकार रहते हुए एक पत्र जारी किया। पत्र में लिखा गया कि अग्रवाल को आवंटित रेत घाट में जो रेत बची हुई है उसे निकालने के लिए १४ करोड़ की राशि सरकार के पास जमा की जानी चाहिए। उस पत्र के हिसाब से वहां फिर से अवैध खुदाई शुरू हुई जो अब भी बदस्तूर चल रही है।

डीएमओ उपयोग कर रहे जिलाधिकारी का अधिकार

महाराष्ट्र सरकार ने नई रेत नीति की जो घोषणा की उसमें साफ कहा गया कि इससे संबंधित कोई भी पत्र जिलाधिकारी ही निकालेंगे। विभागीय आयुक्त को भी निर्देश दिए गए हैं कि सब कुछ कानून से चल रहा है कि नहीं यह सुनिश्चित किया जाए। उसके बाद भी जिला खनिज अधिकारी ठवरे ने जिलाधिकारी के अधिकार खुद ही ले लिए और पत्र जारी कर दिया।

पत्र में किसी भी तरह का रेत खुदाई का आदेश नहीं दिया गया था। उसके बाद भी अग्रवाल ने उस पत्र के आधार पर खुदाई जारी रखी। चंद्रपुर के डीएमओ ठवरे को यह जानकारी थी कि अग्रवाल द्वारा खुदाई की जा रही थी। ७ नवंबर २०२५ को अग्रवाल को एक पत्र भेजकर १४ करोड़ रुपये जमा करने के निर्देश दिये गये। उसके बाद २० नवंबर को भी दूसरा पत्र भेजा गया लेकिन अग्रवाल के कानों में जूं तक नहीं रेंगी।

सरकार को चाहिए अधिकृत करोड़ों रुपए जब अग्रवाल ने जमा नहीं किए तो प्रशासन ने लाचारी में ८ जनवरी को रेत खुदाई बंद करने का फरमान जारी किया। इस फरमान के आधार पर भी कोई काम नहीं हुआ। पहले भंडारा और बाद में ब्रम्हपुरी की राशि मिलाकर करीब १०० करोड़ रुपये का चूना लगने के बाद भी भंडारा जिले में रेत घाट दिए जाने पर हर कोई हैरत में है।

मंत्री सख्त पर सिस्टम में बड़ा सुराख

रेत तस्करी और अवैध खुदाई को लेकर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सख्त रवैया अपना रखा है लेकिन सरकारी सिस्टम में बड़ा सुराख नजर आ रहा है। भंडारा-गोंदिया और चंद्रपुर जिले के कलेक्टर सही काम कर रहे हैं या नहीं, इसका ध्यान विभागीय आयुक्त और उनके कार्यालय को रखना था लेकिन कोई भी मंत्री का आदेश गंभीरता से लेने को तैयार नहीं है। अब सवाल यही उठाया जा रहा है कि रेत-कारोबार के सिस्टम में ऐसा कौनसा खिलाड़ी आ गया है जो सिस्टम से भी बड़ा हो गया?

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