हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Nursing Jobs: नागपुर जिला परिषद ने वर्ष 2023 में ग्रुप सी के तहत ‘नर्स/स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला)’ के 308 पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। अमीषा शेवरे और अन्य कई छात्राओं ने इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। याचिकाकर्ताओं के पास जीएनएम (जनरल नर्सिंग मिडवाइफरी) और बीएससी नर्सिंग की डिग्री थी।
उन्होंने 16 जून 2024 को आयोजित परीक्षा दी और 17 जुलाई 2024 को घोषित परिणाम में उन्हें पास भी घोषित कर दिया गया। हालांकि, अगस्त 2024 में जब दस्तावेजों का सत्यापन हुआ, तो इन उच्च डिग्री वाली छात्राओं को चयन सूची से बाहर कर दिया गया और केवल निर्धारित ‘एएनएम’ योग्यता वाले उम्मीदवारों को ही योग्य माना गया। इसी फैसले के खिलाफ उम्मीदवारों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश जावलकर और न्यायाधीश देशपांडे ने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल उच्च शैक्षणिक योग्यता होने के आधार पर कोई उम्मीदवार किसी पद के लिए अपनी पात्रता का दावा नहीं कर सकता। हाई कोर्ट ने एएनएम के पद पर नियुक्ति की मांग कर रही जीएनएम और बीएससी नर्सिंग (Nursing) पास उम्मीदवारों की कई याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि ऑनलाइन पोर्टल ने उनके आवेदन स्वीकार किए थे और वे परीक्षा में भी पास हुई हैं। इसलिए उनकी उम्मीदवारी रद्द नहीं की जा सकती। उनका मुख्य तर्क था कि एएनएम केवल 2 साल का कोर्स है, जबकि जीएनएम 3 साल और बीएससी नर्सिंग (Nursing) 4 साल का उच्च कोर्स है, और इन उच्च कोर्सेस में एएनएम का पूरा सिलेबस कवर होता है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञापन में पद का नाम “आरोग्य परिचारिका” लिखा था, जो भ्रामक था।
राज्य सरकार ने अपने 30 सितंबर 2024 के पत्र में स्पष्ट किया था कि एएनएम, जीएनएम और बीएससी नर्सिंग तीनों पाठ्यक्रमों का सिलेबस और अवधि एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। सरकार के अनुसार भले ही जीएनएम और बीएससी नर्सिंग (Nursing) उच्च योग्यताएं हैं, लेकिन वे एएनएम के विशेष कर्तव्यों को पूरा करने के लिए पात्र नहीं हैं।
जिला परिषद ने कोर्ट में बताया कि उनके अधीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एएनएम की जरूरत होती है, जिनका काम मरीजों को नहलाने, कपड़े पहनाने और खिलाने जैसी दैनिक गतिविधियों में मदद करना है। वहीं उच्च योग्यता वाली ‘स्टाफ नर्स’ की नियुक्ति राज्य सरकार के अस्पतालों में होती है और जिला परिषद के पास ऐसा कोई पद ही नहीं है।
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