फांसी से पहले कातिल के मन को पढ़ेगी सरकार, नागपुर कोर्ट ने संजू सरकार केस में मांगी आचरण रिपोर्ट
Nagpur News: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अहेरी मामले में फांसी की सजा पाए दोषी पर अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने सजा की पुष्टि से पहले राज्य सरकार से दोषी की मानसिक व आचरण पर रिपोर्ट मांगी।
- Written By: आकाश मसने
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur News In Hindi: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अहेरी पुलिस स्टेशन क्षेत्र से जुड़े एक जघन्य अपराध में फांसी की सजा पाने वाले दोषी संजू विश्वनाथ सरकार के मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने दोषी की मौत की सजा की पुष्टि की प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दोषी की मनोवैज्ञानिक स्थिति और जेल में उसके आचरण की विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। संजू सरकार की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र डागा ने पैरवी की। हाई कोर्ट ने दोषी संजू सरकार को भी यह स्वतंत्रता दी है कि वह अपनी सजा को कम करने के पक्ष में ‘शमनकारी परिस्थितियां’ पेश कर सके।
क्या है पूरा मामला?
दोषी संजू विश्वनाथ सरकार को निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 450, 376, 302 और 307 के तहत दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। कानून के अनुसार निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा पर हाई कोर्ट की मुहर लगना अनिवार्य है, जिसके तहत यह मामला ‘क्रिमिनल कन्फर्मेशन केस’ के रूप में हाई कोर्ट पहुंचा है।
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि निचली अदालत ने सजा सुनाते समय सर्वोच्च न्यायालय के अनिवार्य दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार कोर्ट ने ‘मनोज बनाम मध्य प्रदेश राज्य’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी दोषी को फांसी देने से पहले उसकी सुधार की संभावनाओं को टटोलना कानूनी रूप से आवश्यक है।
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सरकार से 4 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
- अदालत ने राज्य सरकार को रिपोर्ट 4 सप्ताह के भीतर पेश करने का आदेश दिया।
- मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन रिपोर्ट : दोषी की मानसिक स्थिति को समझने के लिए
- प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट : उसके सामाजिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच के लिए।
- जेल रिपोर्ट : जेल में दोषी का व्यवहार कैसा रहा और उसने वहां क्या काम किया।
