माया इवनाते (सौजन्य-एक्स)
National Commission for Scheduled Tribes: नागपुर की नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद माया इवनाते ने कहा कि महाराष्ट्र में आदिवासी समाज राज्य की कुल आबादी का लगभग 9 प्रतिशत है, इसलिए इसी अनुपात में बजट में समाज के लिए प्रावधान होना चाहिए। इसके लिए वे भविष्य में प्रयास करेंगी। साथ ही आधुनिक तकनीक का उपयोग समाज के विकास के लिए कैसे किया जा सकता है, इस पर भी अध्ययन किया जा रहा है।
माया इवनाते ने कहा कि आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए वे कार्य करेंगी। अपने निर्वाचन के बाद ‘नवभारत’ पहुंचीं इवनाते महाराष्ट्र से राज्यसभा में जाने वाली पहली आदिवासी सांसद हैं। इससे पूर्व वे राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य के रूप में भी काम कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जब वे नागपुर की महापौर थीं तब नागपुरवासियों ने उन्हें भरपूर समर्थन दिया।
उसी समर्थन के बल पर वे राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य के रूप में सफलतापूर्वक काम कर सकीं। नागपुरवासियों के इसी स्नेह के कारण पार्टी ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनने का सम्मान दिया है। इस दौरान संजय बंगाले और क्रीड़ा समिति सभापति दर्शनी धवड़ भी उपस्थित थीं।
उन्होंने बताया कि आयोग में काम करते समय उन्हें दिल्ली का अच्छा अनुभव मिला। उस दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें भाई की तरह मार्गदर्शन दिया और सहयोग किया। इसी वजह से वे समाज के लिए अधिक से अधिक काम कर सकीं। दिल्ली से परिचित होने के कारण आगे काम करने में उन्हें कोई कठिनाई नहीं होगी।
सांसद के रूप में वे विदर्भ, महाराष्ट्र और देश के लिए बेहतर काम करना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि आदिवासी आयोग की सदस्य रहते हुए उन्होंने पूरे समाज के लिए विदर्भ में ठोस काम किए। मेलघाट की दुर्गम बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए कार्य किया। हालांकि अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और अब वे उस कमी को पूरा करने का प्रयास करेंगी।
यह भी पढ़ें – ‘बच्चा चोर’ के शक में बुजुर्ग महिला की बेरहमी से की पिटाई, पुलिस जांच में जो सच निकला वो आपको शर्मिंदा कर देगा
इवनाते ने बताया कि मेलघाट के कुछ गांवों और पाड़ों में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं थी। मूलभूत सुविधाओं की कमी थी लेकिन काम होने के बाद अब स्थिति में काफी सुधार आया है। डीबीटी के माध्यम से कई योजनाओं का लाभ आदिवासी समाज तक पहुंचने लगा है। आगे भी केंद्र और राज्य सरकार की हर योजना का लाभ समाज तक पहुंचाने का प्रयास करेंगी।
माया इवनाते ने कहा कि जंगल आदिवासियों का है। यह समाज देश का मूल निवासी है और जंगल ही उनका घर है। आज भी बड़ी संख्या में लोग जंगलों में रहना पसंद करते हैं। उन्हें शहरों में लाने की कोशिश की जाती है लेकिन वे आने को तैयार नहीं होते, इसलिए भविष्य में जहां आदिवासी रहते हैं वहीं उन्हें सड़क, स्वच्छ पानी, शिक्षा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
सैटेलाइट और इंटरनेट के माध्यम से शिक्षा की व्यवस्था करने की योजना है। आदिवासी समाज अभी बिखरा हुआ है लेकिन अब उसे शिक्षा की मुख्यधारा में लाकर संगठित करने का समय और अवसर दोनों मिला है। भविष्य में संगठित और मजबूत समाज बनाने का लक्ष्य है।