नागपुर यूनिवर्सिटी में भाजयुमो का हल्लाबोल, छात्र समस्याओं पर फिर गरमाई RTMNU; 10 दिन का अल्टीमेटम
Nagpur University Protest: नागपुर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ भाजयुमो ने आंदोलन कर 20 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई के लिए 10 दिन का अल्टीमेटम दिया। छात्रों ने उपकुलपति को दूसरा स्मरण पत्र सौंपा।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर विश्वविद्यालय आंदोलन, भाजयुमो प्रदर्शन,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Nagpur University BJYM Protest: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के कथित लापरवाह और अव्यवस्थित प्रशासन के विरोध में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) एक बार फिर आक्रामक हो गया। पहले दिए गए 20 सूत्रीय मांग पत्र पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से नाराज छात्रों ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलन किया और उपकुलपति को दूसरा स्मरण पत्र सौंपते हुए 10 दिन का अल्टीमेटम दिया।
भाजपा अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी के मार्गदर्शन में भाजयुमो अध्यक्ष सचिन करारे के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने के लिए 20 गमले और 100 पौधे प्रशासन को भेंट किए गए। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उपकुलपति ने आज भी छात्रों से मिलने से इनकार कर दिया और आंदोलन समाप्त होने के बाद ही नागपुर विश्वविद्यालय पहुंचीं।
इससे छात्रों में यह भावना पैदा हुई कि उपकुलपति आंदोलनकारियों और विद्यार्थियों का सामना करने से बच रही हैं तथा उनकी समस्याओं पर जवाब देने से दूर भाग रही हैं। उपकुलपति की इस कथित उदासीनता से नाराज कार्यकर्ताओं ने आंदोलन को और तेज करते हुए यह निर्णय लिया कि जब तक उपकुलपति बाहर आकर उनसे बात नहीं करतीं तब तक वे आंदोलन स्थल नहीं छोड़ेंगे। आखिरकार प्र-उपकुलपति डॉ. पेशवे बाहर आए और छात्रों को संबोधित करते हुए आश्वासन दिया कि कुछ मांगों पर आंशिक रूप से कार्रवाई की जा चुकी है तथा शेष मांगों पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद उन्हें दूसरा स्मरण पत्र और प्रतीकात्मक गमले सौंपे गये।
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मांगें पूरी नहीं, अब दिखाएंगे तीव्रता
इस अवसर पर भाजयुमो अध्यक्ष सचिन करारे ने कहा कि विश्वविद्यालय में परीक्षाएं चल रही है और छात्र रोज नई तकनीकी समस्याओं, हॉल टिकट में त्रुटियों तथा परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्थाओं का सामना कर रहे है। इससे विद्यार्थियों को मानसिक और आर्थिक परेशानी डझेलनी पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशारान छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है और उपकुलपति के पास विद्यार्थियों की समस्याएं सुनने तक का समय नहीं है। भाजयुमो ने बताया कि 19 और 20 मई को भी विश्वविद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर 20 सूत्रीय मांग पत्र दिया गया था तथा प्रशासन को 2 दिन का समय दिया गया था।
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समय सीमा समाप्त होने के बाद भी केवल कुछ मामूली मुद्दों पर कार्रवाई हुई, जबकि प्रमुख समस्याएं जस की तस बनी हुई है। आंदोलन में रितेश पांडे, ऋषभ अरखेल, कुलदीप माटे, नागेश साठवने, बादल राउत, श्रेयस कुंभारे, प्रशंसा भोयर, शंतनू झाडे, आशू गुमगावकर, यश गौर, आर्यन टाकभवरे, प्रयाग पांडे, संकेत जवलकर, कौस्तुभ बैतुले, अर्णव दीप सिंह, राचिका निमगावकर, पायल आरमरकर, रश्मि बावणे, प्रतीका धारड़े, योगिता बुई, कल्याणी कुबहे, श्रद्धा धवले, पूनम बालके, मनीषा तमस्कार आदि ने हिस्सा लिया।
