गुलियन-बैरे सिंड्रोम से लड़ने मेडिकल तैयार…8 बेड और 2 वेंटिलेटर रिजर्व, 4 मरीजों का चल रहा इलाज
पुणे से शुरू गुलियन-बैरे सिंड्रोम अब धीरे-धीरे पूरे राज्य में अपने पैर पसारने की कोशिश कर रहा है। इससे लड़ने के लिए नागपुर में मेडिकल और एम्स पहले ही अलर्ट हो गया है और इसके लिए पहले ही बेड और वेंटिलेटर रिजर्व कर दिए है।
- Written By: प्रिया जैस
नागपुर एम्स हॉस्पीटल (सौजन्य-सोशल मीडिया)
नागपुर: पुणे के बाद सोलापुर जिले में फैल रहे गुलियन-बैरे सिंड्रोम के मद्देनजर मेडिकल, मेयो के बाद अब एम्स ने भी अलर्ट जारी किया है। मेडिकल ने इन मरीजों के लिए 8 बेड आरक्षित किए हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर इन मरीजों के लिए 2 वेंटिलेटर भी आरक्षित किए गए हैं।
इस बात का भी खुलासा हुआ है कि सरकार निजी अस्पतालों में मिलने वाले जीबीएस मरीजों का रिकॉर्ड नहीं रख रही है। इस बीच मनपा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपक सेलोकर ने मंगलवार को सभी निजी अस्पतालों के लिए जीबीएस रोगियों का पंजीकरण करना और मनपा स्वास्थ्य विभाग को सूचित करना अनिवार्य कर दिया है।
यह अज्ञात वायरस डेढ़ से दो सप्ताह के भीतर शरीर में प्रवेश कर आंतरिक अंगों पर हमला करता है। यह मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं की ताकत को कम करता है। इससे रोगी खड़े होने की ताकत खो देता है।
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1,000 इंजेक्शन खरीदने के ऑर्डर
बता दें कि गुलियन-बैरे सिंड्रोम बीमारी के 3 मरीजों को मेडिकल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल सभी मरीजों की हालत स्थिर है और उनका उचित इलाज चल रहा है। गुलियन-बैरे सिंड्रोम से पीड़ित मरीज को ‘इमोग्लोबुलेंट’ का इंजेक्शन दिया जाता है। मेडिकल में इस बीमारी के लिए 50 इंजेक्शन उपलब्ध हैं।
10 हजार का एक इंजेक्शन
एक इंजेक्शन की कीमत करीब 10,000 है। यह गरीब मरीजों की पहुंच में नहीं है। इसके चलते संस्थापक डॉ. राज गजभिये के सुझाव के अनुसार चिकित्सा विभाग में भर्ती मरीजों को यह इंजेक्शन चिकित्सा प्रशासन के खर्चे पर दिया जा रहा है। इसके तहत 1,000 से अधिक इंजेक्शन की खरीदी का ऑर्डर जारी किया गया है। चिकित्सा अधीक्षक अविनाश गावंडे ने बताया कि अगले कुछ दिनों में इंजेक्शन की आपूर्ति हो जाएगी।
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गुलियन-बैरे सिंड्रोम का मुफ्त इलाज
गुलियन-बैरे सिंड्रोम पुणे में ज्यादा सक्रिय है, जहां अब तक इसके 100 से भी ज्यादा मरीज सामने आ चुके है। पुणे में करीब 14 मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया है तो बाकी फिलहाल जनरल वार्ड में है और इस गुलियन-बैरे सिंड्रोम से लड़ रहे है। इस बीमारी में खर्चा उठाना गरीबों के बस का नहीं है इसलिए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पुणे में इस बीमारी के निशुल्क इलाज करने की घोषणा भी की है।
