अंबाझरी पार्क को आग से बचाएगा ‘पैंथेरा’! जानें क्या है वो AI तकनीक जो 3 मिनट में देगी अलर्ट
Ambazari Biodiversity Park Nagpur: अंबाझरी पार्क को जंगल की आग से बचाएगा AI आधारित 'पैंथेरा' सिस्टम। पेंच में सफल रही तकनीक अब नागपुर के इस पार्क के लिए बनेगी रामबाण।
- Written By: प्रिया जैस
अंबाझरी पार्क के लिए ‘पैंथेरा’ सिस्टम (सौजन्य-नवभारत)
Panthera AI System: लगभग 758 हेक्टेयर में फैला अंबाझरी बायोडायवर्सिटी पार्क की सबसे बड़ी चुनौती बार-बार लगने वाली जंगल की आग है। हालांकि 2025 में ऐसी कोई घटना नहीं हुई लेकिन मार्च और मई 2024 में लगी भीषण आग से पार्क की जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचा। हाल ही में पार्क में एक बार फिर आग लग गई थी। वन विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि आग प्राकृतिक थी या मानव निर्मित।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित प्रणाली ‘पैंथेरा’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि सवाल यह उठता है कि पेंच टाइगर रिजर्व में सफल रही यह प्रणाली अभी तक अंबाझरी पार्क तक क्यों नहीं पहुंची है। पेंच टाइगर रिजर्व अंतर्गत कोलितमारा वन क्षेत्र में ‘पैंथेरा’ प्रणाली स्थापित की गई है।
यह प्रणाली समय रहते जंगल की आग का पता लगाने में सक्षम है और ऊंची जगहों पर लगे कैमरे जंगल की आग के सटीक स्थान का पता लगाते हैं। हालांकि अंबाझरी पार्क समतल है, फिर भी इस प्रणाली की मदद से अंबाझरी में भी आग पर आसानी से काबू पाया जा सकता है। अग्निशमन विभाग के कर्मियों के अनुसार अंबाझरी पार्क में मार्च 2024 में लगी आग बहुत भीषण थी।
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इसके बाद मई में बड़े पैमाने पर आग लगी जिससे कई औषधीय पौधों को नुकसान पहुंचा। साथ ही यहां रहने वाले पक्षी भी इस क्षेत्र से पलायन कर गए। 2021 से 2024 के बीच पार्क को भारी नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे में यदि ‘पैंथेरा’ प्रणाली स्थापित की जाए और इसका डैशबोर्ड पास के अग्निशमन केंद्र में लगाया जाए तो आग की जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकती है और समय पर उपाय किए जा सकते हैं।
आखिर क्या है पैंथेरा सिस्टम?
- उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली
- उच्च-रिजॉल्यूशन वाले कैमरों, सेंसरों और उपग्रह आधारित सूचनाओं का उपयोग
- कैमरा फीड और सैटेलाइट डेटा के आधार पर धुएं और बादलों के बीच अंतर करने की क्षमता
- 3 मिनट से भी कम समय में जंगल की आग के बारे में रीयल टाइम अलर्ट
पेंच में पैंथेरा कैसे काम करता है?
कोलितमारा वन क्षेत्र की निरंतर निगरानी करने वाली यह प्रणाली पश्चिम पेंच रेंज कार्यालय के नियंत्रण कक्ष से जुड़ी हुई है। यह प्रणाली दिन-रात कार्यरत रहती है और रात में भी जंगल की आग के सटीक स्थान का पता लगा सकती है। साथ ही यह मौसम परिवर्तन और पिछले आग संबंधी आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए संभावित आग की भविष्यवाणी करने में भी सक्षम है।
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क्यों नहीं हो रहे प्रयास?
वन विभाग को वन क्षेत्रों में लगने वाली आग को नियंत्रित करने का प्रशिक्षण दिया गया है। यदि पेंच टाइगर रिजर्व छोटी-मोटी घटनाओं को भी रोकने के लिए प्रयास कर रहा है तो इस बात की जांच अपेक्षित है कि अंबाझरी जैव विविधता पार्क का प्रबंधन ऐसे प्रयास क्यों नहीं कर रहा है।
– प्रीति पटेल, प्रकृति प्रेमी
फायरलाइन का काम पूरा
अंबाझरी जैव विविधता पार्क में फायरलाइन का काम पूरा हो चुका है। भविष्य में आग लगने की घटनाओं को रोकने के प्रयास जारी हैं। इस संबंध में बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
– शीतल कर्णासे, वन परिक्षेत्र अधिकारी, हिंगना
- नवभारत लाइव पर नागपुर से राघवेंद्र टोकेकर की रिपोर्ट
