Nagpur: तेलंगखेड़ी में सड़क के लिए स्वाहा कर दी 1.69 एकड़ वन भूमि; नियमों को ताक पर रखकर हुआ 'खेल'

Telangkhedi Forest Land: आरटीआई का बड़ा खुलासा। नागपुर के तेलंगखेड़ी में सड़क के लिए 1.69 एकड़ वन भूमि का अवैध डायवर्जन। सुप्रीम कोर्ट के नियमों और फॉरेस्ट एक्ट की अनदेखी का आरोप।
RTI reveals illegal diversion of 1.69 acres of forest land in Telangkhedi, Nagpur for a 24m road project. Experts claim violation of Forest Conservation Act 1980.
तेलंगखेड़ी वन भूमि (सौजन्य-नवभारत)
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RTI Nagpur: एक बड़ी चूक के रूप में तेलंगखेड़ी में 0.6858 हेक्टेयर (1।69 एकड़) झुड़पी वन भूमि को अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासियों (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 का हवाला देते हुए 24 मीटर चौड़ी विकास योजना सड़क के निर्माण के लिए डायवर्ट कर दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अनिवार्य प्रावधानों को दरकिनार करता है।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम से प्राप्त जानकारी के अनुसार नागपुर वन विभाग ने उत्तरी तेलंगखेड़ी स्थित नागपुर पशु चिकित्सा महाविद्यालय को हनुमान मंदिर से जोड़ने वाली सड़क के लिए कृषि प्राधिकरण अधिनियम की धारा 3(2) के तहत मंजूरी दी थी। यह मंजूरी 26 नवंबर 2025 को डीसीएफ विनीता व्यास द्वारा जारी की गई थी।

हालांकि कृषि अधिनियम (एफआरए) की धारा 3(2) के तहत स्कूलों, औषधालयों, आंगनवाड़ियों, पेयजल परियोजनाओं और सड़कों जैसी विशिष्ट सामुदायिक सुविधाओं के लिए 1 हेक्टेयर तक वन भूमि के उपयोग की अनुमति है, बशर्ते कि संबंधित ग्राम सभा द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया हो। यह प्रावधान संघीय कृषि अधिनियम 1980 में सीमित छूट प्रदान करता है और इसके मूल सुरक्षा उपायों को निरस्त नहीं करता है।

प्रस्ताव पर कोई स्पष्टता नहीं

वर्तमान मामले में नागपुर एक नगरपालिका क्षेत्र होने के कारण वन अधिनियम के तहत ग्राम सभा तंत्र की प्रयोज्यता पर ही सवाल उठाया गया है। आरटीआई दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि हालांकि स्थल निरीक्षण रिपोर्ट और वन अधिकारियों की सिफारिशों पर कार्रवाई की गई है लेकिन ग्राम सभा के किसी भी प्रस्ताव पर कोई स्पष्टता नहीं है जो धारा 3(2) के तहत एक अनिवार्य आवश्यकता है।

43 से अधिक पेड़ों की बलि

सड़क परियोजना वन मंजूरी से पहले की है। नागपुर महानगरपालिका ने 18 जुलाई 2023 को निविदा जारी की थी। मूल रूप से 24.53 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना 15.32 करोड़ रुपये में ठेकेदार कंपनी डीसी गुरबक्सानी को सौंपी गई।

जीएसटी और अन्य संबंधित लागतों को मिलाकर परियोजना का कुल मूल्य लगभग 19.15 करोड़ रुपये है। काम शुरू हो चुका है और बताया जा रहा है कि 43 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। पीडीकेवी के कब्जे वाली वन भूमि तेलंगखेड़ी में सर्वेक्षण संख्या 27/1 का हिस्सा है जिसका क्षेत्रफल 8.17 हेक्टेयर है। इसमें से 0.6858 हेक्टेयर सड़क के लिए निर्धारित किया गया है।

पार्किंग प्लाजा निर्माण में भी उल्लंघन

आलोचकों का तर्क है कि शहरी अवसंरचना परियोजना के लिए वन भूमि का उपयोग करने से पहले वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत पूर्व अनुमति प्राप्त की जानी चाहिए थी, विशेष रूप से सर्वोच्च न्यायालय के बार-बार दिए गए निर्देशों के आलोक में जिनमें वन भूमि के उपयोग की कड़ी जांच अनिवार्य की गई है। तेलंगखेड़ी तालाब के सामने एक विशाल पार्किंग प्लाजा और ढाबा में एक कन्वेंशन सेंटर के निर्माण में भी इसी तरह के उल्लंघन किए गए हैं। ये दोनों परियोजनाएं पीडीकेवी के कब्जे वाली वन भूमि पर स्थित हैं। अधिकारियों का कहना है कि इसकी जांच की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन

झुड़पी जंगल को नष्ट करने के लिए अवैध तरीके से फॉरेस्ट एक्ट 2006 का उपयोग किया गया है। इस कारण हरियाली नष्ट हुई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का भी उल्लंघन किया गया है। मनपा द्वारा 90 से अधिक पेड़ काटे गए हैं। - सचिन खोब्रागड़े, पर्यावरण कार्यकर्ता

  • नवभारत लाइव पर नागपुर से अभिषेक सिंह की रिपोर्ट
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