अंबाझरी के गिरते जलस्तर और प्रदूषण से उद्योगों पर संकट, हिंगना इंडस्ट्रीज ने जल गुणवत्ता पर जताई गंभीर चिंता
Ambazari Lake Pollution: अंबाझरी तालाब के प्रदूषण और गिरते जलस्तर ने हिंगना औद्योगिक क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। उद्योगों ने जल गुणवत्ता बिगड़ने से संचालन प्रभावित होने की आशंका जताई है।
- Written By: अंकिता पटेल
अंबाझरी तालाब प्रदूषण,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Hingna Industries Water Crisis: नागपुर अंबाझरी तालाब के गिरते जल स्तर और बढ़ते प्रदूषण ने हिंगना औद्योगिक क्षेत्र की चिंताएं बड़ा दी हैं। एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एमआईए) ने चेतावनी दी है कि यदि जल प्रदूषण पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया ती उद्योगों के संचालन में बड़ी बाधा आ सकती है।
एमआईए के अध्यक्ष पी. मोहन के अनुसार हिंगना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) के लिए अंबाझरी तालाब ही कच्चे पानी का मुख्य स्रोत है। आसपास के इलाकों से अनुपचारित घरेलू सीवेज (गंदा पानी) लगातार तालाब में मिलने के कारण पानी की गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर गई है। पानी में घुलित ऑक्सीजन (डीओ) की कमी हो गई है, जबकि बीओडी और सीओडी का स्तर बढ़ गया है।
जलकुंभी का प्रकोप
जलकुंभी के तेजी से फैलने के कारण पानी में ऑक्सीजन
खत्म हो रही है और दुर्गंध व रंगहीनता की समस्या पैदा हो गई है।
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समाधान की ओर बढ़ते कदम
इस संकट से निपटने के लिए नैनो बबल-असिस्टेंट ऑक्सीकरण जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विचार किया जा रहा है जिसके शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए एमआईडीसी के मुख्य अभियंता राजेश झांझड, कार्यकारी अभियंता शशिकांत पाटिल और उप अभियंता संजय कुमार गौर के नेतृत्व में तकनीकी टीम और उद्योग प्रतिनिधि मिलकर काम कर रहे हैं।
हिंगना एमआईडीसी विदर्भ का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। क्षेत्रीय आर्थिक विकास और औद्योगिक उत्पादकता को बनाए रखने के लिए पानी के स्रोतों की सुरक्षा और ट्रीटमेंट प्लांट का अपफोडेशन अनिवार्य है। यदि सही समय पर कदम उठाए गए तो हिंगना जल प्रबंधन के मामले में एक स्थायी मॉडल बन सकता है।
सिस्टम की विफलता
हिंगना एमआईडीसी का वाटर ट्रीटमेंट प्लाट जिसकी क्षमता 13।5 एमएलडी है। वर्तमान में बढ़ते ऑर्गेनिक तोड को संभालने में संघर्ष कर रहा है। पारंपरिक शोधन विधियां जैसे जमावट और क्लोरीनीकरण अब बेअसर साबित हो रहे है। अत्यधिक क्लोरीनीकरण से हानिकारक ट्राइहेलीमेगेन’ जैसे रसायनों के बनने का खतरा बढ़ गया है, फिल्टर सिस्टम बार-बार चोक हो रहे है जिससे प्लांट की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
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मशीनरी को नुकसान
प्रदूषित पानी के कारण पाइपलाइनों में स्केलिंग (परत जमना), मशीनों में जंग और कूलिंग सिस्टम की दक्षता में कमी आ रही है। इससे उद्योगों का रखरखाव खर्च बढ़ गया है।
उद्योगों पर सीधा प्रहार
विशेष रूप से फार्मास्युटिकल्स (दवा उद्योग), खाद्य प्रसंस्करण और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है। इन उद्योगों में पानी की गुणवत्ता सीधे उत्पाद की गुणवत्ता और कंपनी की प्रतिष्ठा से जुड़ी होती है। पी. मोहन ने जोर देकर कहा कि पानी को केवल एक उपयोगिता नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण कच्चे माल के रूप में देखा जाना चाहिए।
