नागपुर ताडोबा में खनन पर HC सख्त, स्वतः संज्ञान के बाद प्रकल्प पर रोक, अदालत की अनुमति बिना मंजूरी बहाल नहीं

Nagpur Tadoba Mining Controversy: ताडोबा टाइगर रिजर्व में खनन मंजूरी पर हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर सख्त रुख अपनाया। सरकार ने प्रकल्प पर रोक लगाई, अदालत की अनुमति बिना रोक नहीं हटेगी।
HC Takes Strict Stance on Mining in Nagpur-Tadoba Region; Project Halted Following Suo Motu Cognizance; Approval Cannot Be Reinstated Without Court's Permission.
ताडोबा खनन विवाद,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Wildlife Conservation Case: नागपुर ताडोबा टाइगर रिजर्व में राज्य सरकार की ओर से उत्खनन को दी गई मंजूरी को लेकर छपी खबर पर हाई कोर्ट की ओर से स्वयं संज्ञान लिया गया। इसे जनहित के रूप में स्वीकार करते हुए न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने सरकार द्वारा ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व (TATR) में लौह अयस्क खदानों को दी गई मंजूरी पर कड़ा रुख अपनाया था। हाई कोर्ट के रुख को देखते हुए अब राज्य सरकार द्वारा इस प्रकल्प पर रोक लगाए जाने की जानकारी सरकारी वकील ने दी।

इसके बाद न्यायाधीश किल्लोर और -न्यायाधीश वाकोडे ने अदालत की अनुमति के बिना रोक नहीं हटाने का आदेश भी जारी किया। साथ ही प्रतिवादियों को दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति भी प्रदान की। समाचार पत्र में छपी खबर में बताया गया था कि राज्य सरकार ने वन विभाग की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए टाइगर रिजर्व में खनन की अनुमति दे दी है। 35 हेक्टेयर वन भूमि पर होगा खनन यह खदान ब्रम्हपुरी तालुका के लोहाडोंगरी गांव से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित डोंगर काचेपार आरक्षित वन क्षेत्र में प्रस्तावित है।

नागपुर की एक स्टील कंपनी को 2019 में यह लौह खनिज ब्लॉक आवंटित किया गया था जिसके लिए लगभग 35 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह क्षेत्र बाघों, तेंदुओं और अन्य जंगली जानवरों का प्रमुख आवास है।

इस परियोजना पर अक्टूबर 2023 में राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में चर्चा हुई थी। क्षेत्र में बढ़ते मानव वन्यजीव संघर्ष और संवेदनशीलता को देखते हुए 3 सदस्यीय एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस परियोजना को स्पष्ट रूप से नकार दिया था। हालांकि 24 जनवरी 2024 को हुई बैठक में कुछ सुधारों और उपायों के साथ इस परियोजना का मार्ग प्रशस्त कर दिया गया।

विशेषज्ञों के विरोध के बावजूद हरी झंडी

समाचार पत्रों में छपी खबर के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने ताडोबा-अंधारी टाइगर प्रोजेक्ट के बेहद संवेदनशील वन्यजीव कॉरिडोर में प्रस्तावित एक लोहा अयस्क खदान को मंजूरी दे दी है। राज्य वन्यजीव बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्यों के कड़े विरोध को दरकिनार करते हुए यह फैसला लिया गया है, जिससे राज्य में सबसे अधिक वन्यजीव घनत्व वाले इस क्षेत्र के संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

खबरों के अनुसार, वन्यजीव बोर्ड की बैठक के बारे में सदस्यों को केवल एक दिन पहले सूचित किया गया, जबकि नियम के अनुसार 8 दिन पहले सूचना दी जानी चाहिए, सदस्यों का आरोप है कि उन्हें अध्ययन के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और फैसले को जल्दबाजी में थोपा गया।

खनन के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 'घोड़ाइझरी-2 अकारा' नामक 35 हेक्टेयर का नया अभयारण्य जल्द घोषित करने का निर्णय लिया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया अभयारण्य उस प्राकृतिक कॉरिडोर की जगह नहीं ले सकता जो चंद्रपुर, गोंदिया और भंडारा जिलों को जोड़ता है।

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