
मुख्यमंत्री की तीर्थदर्शन यात्रा योजना पर सवाल (सौजन्य-सोशल मीडिया)
नागपुर: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री की तीर्थदर्शन यात्रा शुरू हुई थी। लेकिन चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू होने के बाद से योजना बंद है और नए आवेदनों की स्वीकृति अभी तक शुरू नहीं हुई है। महाराष्ट्र चुनाव से पहले राज्य के 6500 वरिष्ठ नागरिकों ने योजना का लाभ उठाया था और तीर्थ दर्शन किए थे।
अब राज्य में नई सरकार आने के बाद भी इस योजना को अभी तक शुरू नहीं किया गया है और ना ही इसके लिए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहा है। इसके बाद अब सवाल उठाए जा रहे है कि क्या यह योजना सिर्फ चुनाव के लिए लाई गई थी।
लोकसभा चुनाव के बाद महायुति को बड़ा झटका लगा था। इसके बाद सत्तारूढ़ पार्टी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना और लड़की बहिन योजना सहित कई अन्य योजनाओं की घोषणा की थी।
इन योजनाओं का लाभ भी मिलने लगा। हालांकि, 15 अक्टूबर 2024 को विधानसभा चुनाव आचार संहिता लगने के कारण इन योजनाओं को बंद कर दिया गया था। अब सरकार आने के बाद फडणवीस सरकार ने लाडकी बहिन योजना तो शुरू हो गई है लेकिन मुख्यमंत्री की तीर्थदर्शन यात्रा की अभी तक कोई खबर सामने नहीं आई है।
राज्य में देवेंद्र फडणवीस सरकार के आने के बाद आशा जताई जा रही है कि माघ का महीना और महाकुंभ क्षेत्र होने के कारण बड़ी संख्या में लोग इस योजना का लाभ उठाना चाहते है। अधिकारियों का कहना है कि आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलते ही आवेदन स्वीकार कर लिए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत जिलों के हिसाब से लॉटरी निकाली जाती है, जिसमें चुने गए व्यक्ति एक समय में किसी एक निर्धारित तीर्थ स्थल की यात्रा कर सकता है। इसमें यात्रा, भोजन, आवास आदि शामिल होते हैं। यात्रा में होने वाले खर्च की अधिकतम सीमा 30 हजार रुपये प्रति व्यक्ति होती है, जो कि सरकार देती है। बता दें कि अब तक राज्य में 9 जिलों के कुल 6500 वरिष्ठ नागरिक इस योजना का लाभ उठा सकते है। इस योजना में कुल 73 तीर्थस्थल शामिल है।
1. लाभार्थी को महाराष्ट्र राज्य का निवासी होना आवश्यक है।
2. 60 साल से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक इसका लाभ ले सकते हैं।
3. इसका लाभ लेने वाले परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।






