

Nagpur Minor Blackmail Rape Case: नागपुर एक 15 साल की नाबालिग लड़की के साथ ब्लैकमेल कर बार-बार दुष्कर्म करने के आरोप में 58 वर्षीय आरोपी की जमानत याचिका पर लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश नेलिंकर ने कड़ा रुख अपनाते हुए याचिका खारिज कर दी।
जरीपटका पुलिस थाना में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता अपनी मौसी और अन्य परिवार वालों के साथ जरीपटका इलाके में रहती थी जबकि उसके माता-पिता दिल्ली में रहते थे। आरोपी अजय सुदाम देशभ्रतार पीड़िता के पड़ोस में ही रहता था।
अदालत में पेश की गई जानकारी के अनुसार पीड़िता अपने एक दोस्त से बात करने और उसे मैसेज भेजने के लिए आरोपी के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करती थी। इसी बात का फायदा उठाकर 58 वर्षीय आरोपी ने नाबालिग को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
आरोपी ने धमकी दी कि अगर उसने उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाए तो वह उसकी बदनामी कर देगा और सबको उसके दोस्त के बारे में बता देगा। बदनामी के इसी डर के कारण आरोपी ने नाबालिग को मजबूर किया और उसके साथ कई बार जबरन दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।
इस खौफनाक अपराध का पर्दाफाश तब हुआ जब 2 मार्च 2026 को पीड़िता के परिवार के एक सदस्य ने आरोपी को रंगेहाथों पकड़ लिया। इसके बाद बुरी तरह से घबराई पीड़िता ने अपने परिवार वालों को पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद जरीपटका पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। आरोपी अजय देशभ्रतार के खिलाफ गंभीर मामला दर्ज किया गया।
आरोपी के वकील ने दलील दी कि मामले में एफआईआर दर्ज करने में चार महीने की देरी हुई है। अलग-अलग दस्तावेजों में लड़की की उम्र अलग-अलग दिखाई गई है और एक 58 वर्षीय व्यक्ति द्वारा 15 साल की नाबालिग के साथ दुष्कर्म करना 'असंभव' है। इसलिए उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है।
सरकारी वकील ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि एफआईआर में जन्मतिथि (09/04/2006) महज एक टाइपिंग की गलती थी जबकि असल जन्मतिथि 09/04/2010 है। इससे यह पूरी तरह साबित होता है कि पीड़िता की उम्र 15 साल 10 महीने ही है। मामले के तथ्यों और पुलिस जांच के कागजातों को देखने के बाद न्या. एम. एम. नेलिंकर ने आरोपी की हर दलील को नकार दिया।
अदालत ने कहा कि मेडिकल साक्ष्यों से भी आरोपों की पूरी तरह पुष्टि होती है जिसमें पीड़िता के शरीर पर कई पुरानी चोटों के निशान पाए गए हैं। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक 58 वर्ष की आयु के व्यक्ति को इस बात का अनुचित लाभ नहीं उठाना चाहिए था कि एक नाबालिग लड़की अपने दोस्त से बात करने के लिए उसके मोबाइल का उपयोग कर रही थी। अपराध की गंभीरता और इसकी घृणित प्रकृति को देखते हुए हाई कोर्ट ने आरोपी अजय देशभ्रतार की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।