अवैध निर्माण गिराने से पहले 15 दिन का देना होगा नोटिस, महानगरपालिका ने जारी की नई SOP
NMC: अवैध निर्माण को लेकर मनपा ने नई एसओपी जारी की है। मनपा आयुक्त अभिजीत चौधरी द्वारा जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार अब सिटी में अनधिकृत इमारतों को मनमाने ढंग से नहीं तोड़ा जा सकेगा।
- Written By: प्रिया जैस
महानगरपालिका ने जारी की नई SOP (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Corporation: अवैध निर्माण को लेकर मनपा द्वारा होने वाली कार्रवाई को लेकर अब नई एसओपी (प्रक्रिया का क्रम) जारी की गई है। मनपा आयुक्त अभिजीत चौधरी द्वारा जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार अब सिटी में अनधिकृत इमारतों को मनमाने ढंग से नहीं तोड़ा जा सकेगा। अधिकारियों को अब किसी भी अनधिकृत निर्माण को गिराने से पहले मालिक या निवासियों को 15 दिन का कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है।
चौधरी ने 2 दिन पूर्व जारी नई एसओपी में कहा कि यह नोटिस पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजा जाना चाहिए और वापसी रसीद मांगी जानी चाहिए और इसे इमारत पर प्रमुखता से चिपकाया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बिना उचित प्रक्रिया के कोई भी निर्माण न हो। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा दायर कई याचिकाओं के जवाब में उठाया गया है जिसने देशभर की नगर निकायों को अवैध निर्माण के खिलाफ कानूनों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।
पहले के परिपत्रक में भ्रम की स्थिति
राज्य के नगर विकास विभाग ने भी इस साल की शुरुआत में निर्देश जारी किए थे। हालांकि एनएमसी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पहले के परिपत्रों में स्पष्टता की कमी के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हुई और प्रवर्तन अभियान धीमा हो गया। 7 मई को मनपा के नगर नियोजन विभाग ने एमआरटीपी अधिनियम, 1966 की धारा 53 और महाराष्ट्र स्लम अधिनियम, 1971 की धारा 3Z-1 के तहत अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करने के संबंध में एक अधिसूचना जारी की।
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हालांकि अधिसूचना में अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई थी। नगर नियोजन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि संशोधित एसओपी का उद्देश्य इन कमियों को दूर करना और एकरूपता, पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है।
पीड़ित को सुनवाई का मौका
नये नियमों के अनुसार, पिछली तारीख या चुनिंदा कार्रवाई के आरोपों को रोकने के लिए प्रत्येक नोटिस की एक प्रति कलेक्टर कार्यालय को भेजना भी जरूरी है। इसके अलावा नोटिस में उल्लंघन की प्रकृति, उल्लंघन किए गए कानूनी प्रावधान, मालिक से अपेक्षित दस्तावेज और सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष सुनवाई की समय-सारिणी स्पष्ट होनी चाहिए। नोटिस तामील होने के बाद एक व्यक्तिगत सुनवाई होगी जहां मालिक या निवासी निर्माण का बचाव कर सकेंगे।
उसके बाद एक स्पीकिंग ऑर्डर पारित किया जाएगा जिसमें यह दर्ज किया जाएगा कि संरचना नियमितीकरण के योग्य है या नहीं। निर्माण तभी ध्वस्त किया जा सकता है जब निर्माण अनधिकृत पाया जाए, 15 दिन की अपील अवधि बीत चुकी हो और उच्च अधिकारियों द्वारा कोई स्थगन आदेश जारी न किया गया हो।
एनएमसी पोर्टल पर भी अपलोड होगी जानकारी
एसओपी में प्रत्येक निर्माण का वीडियो और फोटो दस्तावेजीकरण, 2 गवाहों द्वारा हस्ताक्षरित विस्तृत स्थल पंचनामा तैयार करने और सभी निर्देशों, उत्तरों और अंतिम आदेश को समर्पित एनएमसी पोर्टल पर अपलोड करने पर ज़ोर दिया गया है। कानून-व्यवस्था की समस्याओं से बचने के लिए सभी विध्वंस कार्यों के दौरान पुलिस की तैनाती अनिवार्य कर दी गई है। प्रत्येक मामले में मालिकों को पहले एक निश्चित समय के भीतर स्वेच्छा से अपने अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए कहा जाएगा।
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निर्देश में 3 प्रकार के मामले शामिल हैं जिसके अनुसार वे मामले जिनमें महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन (एमआरटीपी) अधिनियम की धारा 53 के तहत नोटिस जारी किए जा चुके हैं, नये मामले जिनमें नोटिस जारी नहीं किए गए हैं और घोषित स्लम क्षेत्रों में निर्माण जहां महाराष्ट्र स्लम अधिनियम, 1971 की धारा 32-1 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
