नागपुर में किसानों को राहत: पालक मंत्री बावनकुले का आदेश, पेंच प्रकल्प से तुरंत छोड़ा जाए सिंचाई का पानी!
Kharif Irrigation Water: नागपुर में खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए पेंच प्रकल्प का पानी तुरंत छोड़ने के निर्देश पालक मंत्री बावनकुले ने दिए। साथ ही पेयजल संकट न हो, इसके लिए जल प्रबंधन पर भी जोर दिया।
- Written By: अंकिता पटेल
खरीफ फसल, चंद्रशेखर बावनकुले (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Nagpur Farmers Irrigation Plan: नागपुर खरीफ सीजन में फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अधिकारियों को पेंच परियोजना का पानी तत्काल किसानों के लिए छोड़ने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पानी के अभाव में किसी भी किसान की फसल प्रभावित नहीं होनी चाहिए और सिंचाई का पानी योजनाबद्ध तरीके से अंतिम छोर तक पहुंचाया जाए।
एल नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने जल प्रबंधन को लेकर सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। जल संसाधन विभाग ने सभी संबंधित प्राधिकरणों को 31 अगस्त तक पेयजल प्रबंधन की विस्तृत योजना तैयार करने को कहा है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की जल संकट की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
सिंचाई व्यवस्था पर विशेष जोर
बावनकुले ने कहा कि खरीफ सीजन किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में समय पर सिंचाई का पानी उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने सिंचाई विभाग को निर्देश दिए कि जल वितरण की योजना वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से बनाई जाए, ताकि हर गांव और हर खेत तक समान रूप से पानी पहुंचे।
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उन्होंने कहा कि जल वितरण के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जल उपयोगकर्ता संस्थाओं और किसान प्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। इससे पानी का न्यायसंगत वितरण होगा और किसी क्षेत्र में अनावश्यक कमी या विवाद की स्थिति नहीं बनेगी।
पानी की बर्बादी रोकने के निर्देश
पालक मंत्री ने अधिकारियों से सिंचाई के दौरान पानी की बर्बादी रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करने को कहा। उन्होंने आवश्यकता वाले क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करने और जल उपयोग की लगातार समीक्षा करने के निर्देश दिए, ताकि उपलब्ध जल का अधिकतम और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
पेयजल को मिलेगी पहली प्राथमिकता
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि जलाशयों में उपलब्ध पानी का उपयोग सबसे पहले पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाएगा। इसके बाद बचा हुआ पानी सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए नियोजित ढंग से वितरित किया जाएगा।
बावनकुले ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलाशयों में उपलब्ध जल भंडार, वर्षा की स्थिति और मौसम के संभावित बदलावों की नियमित समीक्षा की जाए। परिस्थितियों के अनुसार जल वितरण योजना में समय-समय पर आवश्यक संशोधन भी किए जाएं।
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उन्होंने दोहराया कि किसी भी परिस्थिति में पेयजल संकट उत्पन्न नहीं होना चाहिए। इसके लिए जल संसाधन विभाग, सिंचाई विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ समन्वय बनाकर कार्य करें, ताकि किसानों की सिंचाई और नागरिकों के पेयजल दोनों की आवश्यकताएं समय पर पूरी हो सकें।
