नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस (सौजन्य-सोशल मीडिया)
BJP Internal Conflict Nagpur: नागपुर महानगर पालिका के आम चुनावों में चौथी बार भारी बहुमत से जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी में पदों को लेकर काफी उथल-पुथल मची हुई है। इसका हश्र यह हो रहा है कि चुनाव में पार्टी को मजबूत स्थिति में पहुंचाने वाले राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने महानगर पालिका से ही किनारा करना शुरू कर दिया है।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 6 फरवरी को महापौर का चुनाव होने के बाद 7 फरवरी को दोनों नेताओं की उपस्थिति में पदग्रहण करने का निर्णय लिया गया था किंतु नेताओं की ओर से समय नहीं मिल पाया। इसके बाद महापौर, उपमहापौर और सत्ता पक्ष नेता ने मुख्यमंत्री फडणवीस से भेंट की थी।
इसके बाद महापौर, उपमहापौर और सत्ता पक्ष नेता का 9 को पदग्रहण करने का निर्णय लिया गया। इसके अनुसार तैयारियां भी पूरी कर ली गईं किंतु अब पदग्रहण के दौरान दोनों नेताओं के नहीं होने की जानकारी सूत्रों ने दी।
जानकारों की मानें तो मनपा के आम चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने कई रैलियां और सभाएं कीं। गलियों तक में जाकर पार्टी के लिए मतदान करने की अपील मतदाताओं से की किंतु अब जीतने के बाद महापौर और उपमहापौर के पदग्रहण में उनकी अनुपस्थिति चिंता का विषय बन गया है।
इस बात भी आश्चर्य जताया जा रहा है कि सोमवार की सुबह केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सिटी में तो हैं, किंतु पदग्रहण में आने की उन्होंने हामी नहीं भरी है। यहां तक कि जिस समय सुबह उनकी पत्रकार परिषद है, उसी समय मनपा में पदग्रहण समारोह होने जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार 102 पार्षद के भारी बहुमत के बाद पदों के बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर काफी नाराजगी है। यहां तक कि पार्षदों ने कुछ पदों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। यही कारण रहा कि 6 फरवरी की विशेष सभा में विषय होने के बावजूद स्थायी समिति नहीं हो पायी। अब इस माह के अंतिम सप्ताह तक इंतजार करना पड़ेगा।
बताया जाता है कि रविवार को कुछ स्थानीय नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भेंट की, जिसमें मनपा में स्थायी समिति के सदस्यों और मनपा में मनोनीत सदस्यों को लेकर चर्चा भी की गई किंतु पार्षदों के बीच मचे घमासान के कारण फिलहाल स्थायी समिति सभापति को छोड़कर अन्य 10 सदस्यों और “को-आप” (मनोनीत पार्षद) के रूप में मनपा में भेजे जाने वाले 7 नामों पर कोई अंतिम मुहर नहीं लग पायी।
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नियमों के अनुसार महापौर और उपमहापौर के चुनाव के लिए मनपा की ओर से विशेष सभा ली गई, किंतु अब अन्य विषयों के लिए सभा का आयोजन कब होगा, इसे लेकर ही अनिश्चितता है। माना जा रहा है कि फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च के पहले सप्ताह में मनपा की आम सभा होगी जिसमें स्थायी समिति के सदस्यों का विषय तो रखा जाएगा किंतु को-आप के जरिए मनपा में पहुंचने वालों को कुछ इंतजार अभी भी करना पड़ सकता है।
मनपा के नियमों के अनुसार महापौर, उपमहापौर, सत्ता पक्ष और विपक्ष नेता का चयन होने के बाद उन्हें प्रशासन की ओर से गाड़ी उपलब्ध कराई जाती है। 16 जनवरी को चुनाव के परिणामों के बाद यह लगभग निश्चित हो गया था कि संवैधानिक पदों पर जल्द ही किसी की नियुक्ति होगी जिससे उन्हें वाहन भी उपलब्ध कराना होगा।
4 वर्षों के बाद चुनाव होने के बावजूद प्रशासन की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। यही कारण रहा कि महापौर और उपमहापौर के चुनाव के बाद दोनों को पुरानी गाड़ियां तो उपलब्ध कराई गईं, किंतु सत्ता पक्ष नेता और विरोधी पक्ष नेता को अब तक गाड़ियां उपलब्ध नहीं कराई गईं।
सोमवार को दोपहर 12 बजे मनपा मुख्यालय में महापौर, उपमहापौर और सत्तापक्ष नेता का पदग्रहण होगा। इसके लिए समारोह का आयोजन होगा। इसी क्रम में दोपहर 3 बजे शहर कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक विकास ठाकरे तथा प्रदेश के पदाधिकारियों की उपस्थिति में विरोधी पक्ष नेता संजय महाकालकर का भी पदग्रहण होगा।