बढ़ते तापमान से झुलसा जनजीवन, अंगारों जैसी सड़कें, नागपुर में गर्मी का प्रचंड प्रहार
Nagpur Heatwave Alert: अप्रैल के अंतिम सप्ताह में भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान ने नागपुर को झुलसा दिया है। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा और हीटवेव जैसे हालात से जनजीवन प्रभावित है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर हीटवेव,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Rising Temperature: नागपुर इन दिनों शहर मानो आग की भड्डी में बदल गया है। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में ही तापमान ने अपने तेवर इतने तेज कर दिए हैं कि शहर की सड़कें सचमुच आग उगलती नजर आ रही हैं। दोपहर के समय हालात इतने गंभीर हो जाते हैं कि घर से बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है।
सड़क पर चलते ही ऐसा महसूस होता है जैसे पैरों के नीचे अंगारे बिछे हो और ऊपर से तपता सूरज सीधे सिर पर बरस रहा हो। दोपहर 12 बजे के बाद प्रमुख मार्गों पर सन्नाटा छा जाता है और लोग जरूरी काम भी सुबह या शाम में निपटाने लगे हैं।
महंगी कारों के एसी भी फेल
गर्मी का असर अब इस कदर बढ़ चुका है कि महंगी से महंगी कारों के एसी भी कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं। धूप में खड़ी गाड़ियों के अंदर तापमान इतना अधिक हो जाता है कि एसी चालू होने के बाद भी काफी देर तक राहत नहीं मिलती। कई वाहन चालकों का कहना है कि सफर के दौरान भी ठंडी हवा का असर कम महसुस हो रहा है जिससे परेशानी और बढ़ गई है।
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सीमेंट की सड़कें बनीं हीट ट्रैप
शहर में तेजी से बढ़ रही सीमेट कंक्रीट की सहके भी इस भीषण गर्मी की बड़ी वजह बनती जा रही है। सीमेंट की सड़के दिनभर सूर्य की गर्मी को तेजी से परावर्तित (रिपलेक्ट करती रहती है जिससे आसपास का तापमान और अधिक महसूस होता है।
जिन इलाकों में कंक्रीट रोड़ ज्यादा है, वहां गमीं का असर तीव्र हो गया है और राहगीरों को अधिक तपिश झेलनी पड़ रही है, शहर में बढ़ते कंक्रीटीकरण के कारण हीट आइलैंड इफेक्ट’ तेजी से बढ़ रहा है।
यानी जहां कंक्रीट ज्यादा और हरियाली कम होती है यहां तापमान अविवा रहता है। यदि समय रहते हरित क्षेत्र नहीं बढ़ाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
जहां हरियाली, वहां राहत
इसके विपरीत जहां डामर (अस्फाल्ट) की सड़के और घने पेड़ मौजूद हैं वहां तापमान अपेक्षाकृत कम महसूस होता है। सिविल लाइंस, नौरी, सोनेगांव, गोरेवाड़ा, सेमीनरी हिल्स और जेल रोड जैसे हिस्सों में हरियाली के कारण वातावरण थोड़ा संतुलित बना हुआ है।
पेड़ों की छांव न सिर्फ सीधी धूप से बचाती है बल्कि आसपास के तापमान को भी नियंत्रित करती है। लेकिन इन इलाकों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश नागपुर इस समय तपती भट्टी में तब्दील हो चुका है।
चौराहों पर हो रही ‘तपती परीक्षा’
गर्मी का सबसे ज्यादा असर दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों पर पड़ रहा है। चौराहों पर रेड सिग्नल लगते ही उनकी हालत खराब हो जाती है। हेलमेट के अंदर पसीना बहने लगता है, चेहरे पर लू के थपेड़े पड़ते हैं और गर्म हवा सांस लेना मुश्किल कर देती है।
कई लोग अपने चेहरे को गमछे या दुपट्टे से ढंककर सफर कर रहे हैं, फिर भी राहत नहीं मिल रही। सिग्नल पर रुकते ही लोग छाया की तलाश में इधर-उधर नजर दौड़ाते दिखाई देते हैं।
पिछले 7 दिनों में थर्मामीटर का हाल
| क्रमांक | दिनांक | अधिकतम तापमान (°से.) | न्यूनतम तापमान (°से.) |
|---|---|---|---|
| 1 | 28 अप्रैल | 45.0 | 27.2 |
| 2 | 27 अप्रैल | 45.4 | 24.8 |
| 3 | 26 अप्रैल | 44.2 | 24.6 |
| 4 | 25 अप्रैल | 43.4 | 23.6 |
| 5 | 24 अप्रैल | 43.2 | 24.2 |
| 6 | 23 अप्रैल | 42.8 | 23.4 |
| 7 | 22 अप्रैल | 42.2 | 27.8 |
ठंड में रैन बसेरा तो गर्मी में शेड क्यों नहीं
आमतौर पर हर शहर में स्थानीय प्रशासन कड़ाके की ठंड में सड़क किनारे और गरीबों के लिए रैन बसेरा की व्यवस्था करते रहे हैं,
लेकिन भीषण गर्मी में पीने के पानी के प्याऊ के अलावा कभी भी धूप से बचने या थोड़ी देर रुककर कर राहत दिलाने के लिए सड़क किनारे या चौराहों पर शेड की व्यवस्था नहीं दिखती।
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अब तो सड़क किनारे से प्याऊ का दौर भी समाप्त होता सा दिख रहा है। ऐसे में पैदल चलने वाले या दोपहिया वाहन चालकों को मौसम की इस मार से राहत दिलाने के लिए प्रशासन को विचार करना जरूरी है।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सड़कों के किनारे बड़े पेड़ों की की जरूरत भी समझ आ रही है। प्रशासन को इस बारे में गंभीरता से विचार करना जरूरी है।
