पिंपरी-चिंचवड़: स्मार्ट सिटी के नाम पर 1400 करोड़ खर्च, फिर भी योजनाएं अधूरी; मनपा पर हर साल 50 करोड़ का बोझ

Pimpri Chinchwad Smart City News: पिंपरी-चिंचवड़ में स्मार्ट सिटी मिशन की समय-सीमा बीतने के बाद भी काम अधूरा 1400 करोड़ खर्च होने के बावजूद मनपा पर हर साल 50 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
Pimpri-Chinchwad Smart City projects remain incomplete after ₹1400cr spend. Delayed merger with PCMC causes an annual financial burden of 50cr on the civic body.
पिंपरी-चिंचवड़ में स्मार्ट सिटी मिशन (सो. एआई)
Published on
Updated on

Pimpri Chinchwad Infrastructure Project News: पिंपरी-चिंचवड़ में 'स्मार्ट सिटी' योजना के तहत जिस आधुनिक और सुविधासंपन्न शहर का सपना दिखाया गया था, वह अब अधूरी परियोजनाओं और वित्तीय बोझ के रूप में सामने आ रहा है। वर्ष 2015 में शुरू हुई इस योजना के अंतर्गत शहर को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने का लक्ष्य रखा गया था। तीसरे चरण में चयनित होने के बाद 'पिंपरी-चिंचवड़ स्मार्ट सिटी कंपनी' का गठन किया गया और बड़े पैमाने पर विकास कार्यों की घोषणा हुई। लेकिन आठ वर्षों में लगभग 1400 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद अधिकांश परियोजनाएं या तो अधूरी हैं या अपेक्षित गुणवत्ता तक नहीं पहुंच सकी हैं।

समय-सीमा बीतने के बाद भी जारी कामकाज

केंद्र सरकार ने जून 2023 में इस योजना को समाप्त करने के निर्देश दिए थे और स्थानीय प्रशासन ने 31 मार्च 2025 तक इसे बंद करने की समय-सीमा तय की थी। इसके बावजूद कंपनी का कामकाज अब भी जारी है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। जानकारों के अनुसार, यह देरी केवल प्रशासनिक अक्षमता का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक कारण भी हैं। स्मार्ट सिटी कंपनी के निदेशक पद से मिलने वाले अधिकार और प्रभाव के चलते कई पदाधिकारी इसे छोड़ना नहीं चाहते, जिससे कंपनी को महानगर पालिका में विलय करने की प्रक्रिया लगातार टल रही है।

अधूरी परियोजनाओं के बाद भी ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं

पिंपरी-चिंचवड़ स्मार्ट सिटी योजना के तहत सौर ऊर्जा, स्मार्ट किऑस्क, रिवर डेवलपमेंट, साइकिल ट्रैक, पब्लिक वाई-फाई और स्टार्टअप इनोवेशन सेंटर जैसे कई प्रोजेक्ट शुरू किए गए थे। इसके अलावा कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, स्मार्ट पार्किंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम जैसी तकनीकी योजनाओं पर भी भारी खर्च किया गया। लेकिन जमीनी स्तर पर इनमें से कई योजनाएं अधूरी हैं या उनका उपयोग सीमित है। ठेकेदारों द्वारा समय पर काम पूरा न करने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना भी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाता है।

प्रशासन पर हर साल बढ़ता जा रहा आर्थिक बोझ

इस पूरी स्थिति का सबसे बड़ा असर पिंपरी-चिंचवड़ शहर के वित्तीय ढांचे पर पड़ रहा है। स्मार्ट सिटी कंपनी के संचालन, अधिकारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्चों के कारण मनपा पर हर साल लगभग 50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। यह तब है, जब शहर की अन्य बुनियादी जरूरतों के लिए अक्सर धन की कमी का हवाला दिया जाता है। अब कंपनी को बंद करने और परियोजनाओं के हस्तांतरण के लिए नए सलाहकारों की नियुक्ति की जरूरत भी खर्च को और बढ़ाएगी।

नेतृत्व परिवर्तन और धीमी निर्णय प्रक्रिया

प्रशासनिक स्तर पर लगातार हो रहे बदलावों ने भी इस समस्या को जटिल बनाया है। आयुक्त स्तर पर बदलाव और राजनीतिक दबाव के कारण निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। चुनावी माहौल ने भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने की गति को धीमा कर दिया है, जिससे परियोजनाओं का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।

जनता के सवाल और भविष्य की राह

  • पिंपरी-चिंचवड़ की जनता अब यह जानना चाहती है कि उनके टैक्स का पैसा आखिर कब तक अधूरी योजनाओं में फंसा रहेगा।
  • जब तक सभी परियोजनाओं का स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं होता और स्मार्ट सिटी कंपनी का पूर्ण विलय महानगरपालिका में नहीं किया जाता, तब तक यह आर्थिक बोझ शहर के विकास में बाधा बना रहेगा।
  • अंततः, नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना अब प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक खींचतान का उदाहरण बनती जा रही है।
Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com