नागपुर मनपा को हर महीने 20 लाख का नुकसान? गैर-कर्मचारियों के खातों में वेतन, लकड़गंज जोन पर गंभीर सवाल
Nagpur Municipal Corporation: नागपुर मनपा के लकड़गंज जोन में वेतन वितरण में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। गैर-कर्मचारियों के खातों में वेतन जमा होने के आरोपों के बीच उच्च स्तरीय जांच की मांग।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर मनपा, लकड़गंज जोन, वेतन अनियमितता, (सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Nagpur Lakadganj Salary Scam: नागपुर मनपा के लकड़गंज जोन में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बूटीबोरी स्थित मोरारजी कपड़ा मिल में काम करने वालों को महानगरपालिका (मनपा) अपनी ओर से वेतन दे रही है। वह भी 2019 से यह खेल खेला जा रहा है। ऐसे कर्मचारियों की पूरी सूची है। अब सवाल यह उठता है कि इस खेल में कौन-कौन शामिल हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता नितिन तिवारी ने आरोप लगाया है कि इसमें पूरा तंत्र शामिल है और प्रति माह मनपा को 15 से 20 लाख रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
इस तंत्र की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि लूट का पर्दाफाश हो सके। तिवारी के नेतृत्व में महानगरपालिका के आयुक्त विपिन इटनकर एवं महापौर नीता ठाकरे को संयुक्त रूप से विस्तृत निवेदन सौंपकर लकड़गंज जोन में ग्रुप-डी कर्मचारियों के वेतन एवं राखी एडवांस वितरण में हुए कथित आर्थिक अनियमितताओं के गंभीर प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई।
संज्ञान में लाया गया कि वर्ष 2019 से लेकर वर्तमान समय तक वेतन वितरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं होने की आशंका है। प्राप्त दस्तावेजों, बैंक लेन-देन की जानकारी तथा उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह संदेह व्यक्त किया गया है कि कुछ ऐसे व्यक्तियों के बैंक खातों में वेतन की राशि जमा की गई जो नागपुर महानगरपालिका के नियमित कर्मचारी नहीं थे।
सम्बंधित ख़बरें
अकोला GMC वायरल वीडियो: 2 सुरक्षा गार्ड बर्खास्त, वार्डबॉय को भेजा गया अनिवार्य अवकाश पर
हिंजवडी ट्रैफिक जाम से परेशान आईटी प्रोफेशनल्स, शिवाजीनगर-मेट्रो शुरू होने का इंतजार बढ़ा
चंद्रपुर: जेवर चमकाने के बहाने लाखों की ठगी, बिहार की अंतरराज्यीय गैंग गिरफ्तार, 6 तोला सोना बरामद
पुणे में बम धमकी से मचा हड़कंप, मनपा मुख्यालय और आरएसएस कार्यालय की चार घंटे तक तलाशी
इस संबंध में कई कथित लाभार्थियों के बैंक स्टेटमेंट एवं अन्य दस्तावेजी प्रमाण भी आयुक्त को सौंपे गए। इन दस्तावेजों के आधार पर यह मांग की गई कि वेतन सूची तैयार करने से लेकर भुगतान प्रक्रिया तक शामिल सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
दर्ज हो आपराधिक मामला
तिवारी ने कहा कि यदि जांच में शासकीय निधि के दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग, आर्थिक अपहार या किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर आर्थिक अपराध शाखा अथवा अन्य सक्षम जांच एजेंसी के माध्यम से विस्तृत जांच कराई जानी चाहिए।
इस अवसर पर आयुक्त ने प्रस्तुत दस्तावेजों एवं बैंक स्टेटमेंट का अवलोकन करते हुए प्रकरण को गंभीरता से लेने तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई एवं जांच प्रक्रिया प्रारंभकरने का आश्वासन दिया।
काम पर नहीं, फिर भी वेतन
तिवारी ने आरोप लगाया कि मनपा के लकड़गंज जोन में बिल क्लर्क के पास काम कर रही जमादार महिला उज्ज्वला भगत और कम्प्यूटर ऑपरेटर साहिल सारवन द्वारा मोरारजी मिल बूटीबोरी में काम करने वाले कामगारों और उनके परिवारजनों के नाम जोन में काम करने वाले सरकारी ग्रुप-डी के कर्मचारियों की सूची में समाविष्ट कर वेतन भुगतान करने वाले बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा को भेजे गए।
यह भी पढ़ें:- मानसून से पहले नागपुर की सड़कें बनीं मुसीबत, बढ़ा हादसों का खतरा; अधूरी मरम्मत पर उठे सवाल
फलस्वरूप प्रति माह 15 से 20 लाख रुपए बैंक द्वारा सरकारी तिजोरी से वसूले गए, समय-समय पर फर्जी लाभार्थियों के नाम बदलते रहे। वर्ष 2019 से अब तक करोड़ों रुपए की इस अवैध वेतन वसूली के काम को नियमित वेतन और राखी एडवांस के रूप में अंजाम देकर चलाया जा रहा है और सरकारी तिजोरी को चूना लग रहा है, इसलिए संपूर्ण प्रक्रिया में शामिल संबंधित कर्मचारियों, बिल विभाग, जिम्मेदार अधिकारियों एवं प्रशासनिक स्तर पर हुई स्वीकृतियों की भी जांच आवश्यक है।
निलंबित करने की मांग
निवेदन में विशेष रूप से मांग की गई कि बिल विभाग से संबंधित कार्य देखने वाली उज्ज्वला भगत तथा कम्प्यूटर ऑपरेटर साहिल सारवन सहित इस प्रकरण से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जांच पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए, ताकि जांच निष्पक्ष एवं प्रभावी ढंग से संचालित हो सके और उन पर पुलिस में मामला दर्ज करवाया जाए, इसके अतिरिक्त वर्ष 2019 से अब तक के सभी वेतन भुगतान, राखी एडवांस, उपस्थिति रिकॉर्ड, सेवा पुस्तिकाए, वेतन सूची एवं बैंक भुगतान संबंधी दस्तावेजों का विशेष ऑडिट कराए जाने की भी मांग की गई।
