कौन हैं आईएएस अश्विनी भिड़े? आरे विवाद से लेकर मुंबई की कायापलट करने तक की पूरी कहानी
Ashwini Bhide IAS: आईएएस अश्विनी भिड़े बनीं बीएमसी कमिश्नर। जानें उनके मेट्रो प्रोजेक्ट्स, आरे विवाद और देवेंद्र फडणवीस के साथ उनके खास प्रशासनिक तालमेल की पूरी कहानी।
- Written By: अनिल सिंह
BMC Commissioner Ashwini Bhide (फोटो क्रेडिट-X)
BMC Commissioner Ashwini Bhide: महाराष्ट्र की प्रशासनिक गलियारों में अश्विनी भिड़े (Ashwini Bhide) एक ऐसा नाम हैं, जिन्हें उनकी कार्यकुशलता, अनुशासन और बड़े प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए जाना जाता है। हाल ही में उन्हें बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के कमिश्नर की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो मुंबई का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद है।
अश्विनी भिड़े 1995 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। उनकी छवि एक ‘रिजल्ट ओरिएंटेड’ ऑफिसर की रही है। आइए जानते हैं उनके करियर और उनके रसूख के पीछे की कहानी:
अश्विनी भिड़े का करियर और महत्वपूर्ण कार्य
अश्विनी भिड़े ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है, लेकिन उनकी असली पहचान मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलने वाले प्रोजेक्ट्स से जुड़ी है।
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मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MMRCL): अश्विनी भिड़े को सबसे ज्यादा प्रसिद्धि मुंबई मेट्रो लाइन-3 (कोलाबा-बांद्रा-सीप्ज़) प्रोजेक्ट के लिए मिली। एमएमआरसीएल की प्रबंध निदेशक (MD) के रूप में उन्होंने इस बेहद जटिल अंडरग्राउंड मेट्रो प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया।
आरे कॉलोनी विवाद: मेट्रो कार शेड के लिए आरे में पेड़ों की कटाई के दौरान वह काफी चर्चा में रहीं। भारी विरोध के बावजूद उन्होंने कानूनी और प्रशासनिक मोर्चे पर मजबूती से पक्ष रखा, जिससे उनकी छवि एक सख्त अधिकारी के रूप में उभरी।
अतिरिक्त नगर आयुक्त (BMC): वह पहले भी बीएमसी में एडिशनल कमिश्नर के पद पर रह चुकी हैं, जहाँ उन्होंने शहर के प्रबंधन और तटीय सड़क (Coastal Road) जैसे प्रोजेक्ट्स की निगरानी की थी।
शिक्षा और शुरुआती पद: उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से स्नातक किया और आईएएस बनने के बाद महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में जिला कलेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में काम किया।
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कैसे बनीं देवेंद्र फडणवीस की पसंदीदा अधिकारी?
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम रहती है कि अश्विनी भिड़े उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में से एक हैं। इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:
मेट्रो प्रोजेक्ट का जुनून: जब 2014-2019 के दौरान फडणवीस मुख्यमंत्री थे, तब ‘मुंबई मेट्रो’ उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था। अश्विनी भिड़े ने जिस तरह से इस प्रोजेक्ट की अड़चनों को दूर किया और इसे गति दी, उसने फडणवीस का भरोसा जीता।
दबाव में काम करने की क्षमता: आरे विवाद और पर्यावरणविदों के कड़े विरोध के दौरान भी भिड़े पीछे नहीं हटीं। फडणवीस को ऐसे अधिकारी पसंद हैं जो राजनीतिक दबाव के बावजूद विकास कार्यों को रुकने नहीं देते।
तकनीकी समझ और स्पष्टता: भिड़े को उनके डेटा-संचालित दृष्टिकोण (Data-driven approach) और जटिल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स की गहरी समझ के लिए जाना जाता है, जो फडणवीस के ‘विजनरी’ विकास एजेंडे से मेल खाता है।
निष्ठा और परिणाम: फडणवीस के कार्यकाल के दौरान उन्हें एमएमआरसीएल से हटाया गया था (जब सत्ता परिवर्तन हुआ), लेकिन जैसे ही शिंदे-फडणवीस सरकार वापस आई, उन्हें फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं।
बीएमसी कमिश्नर के रूप में चुनौतियां
अब बीएमसी कमिश्नर के रूप में उनके सामने मुंबई की बुनियादी समस्याओं जैसे- सड़कों के गड्ढे, मानसून में जलभराव, प्रदूषण नियंत्रण और आगामी बीएमसी चुनावों को निष्पक्षता से संपन्न कराने की बड़ी चुनौतियां हैं।
