लाखों की फीस वसूलने वाले कोचिंग संस्थान डकैत; नेताओं और माफियाओं की सांठगांठ पर भड़के राधाकृष्ण विखे पाटिल
NEET Paper Leak: मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने नीट पेपर लीक विवाद के बीच निजी कोचिंग संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने हर कॉलेज में नीट कोचिंग अनिवार्य करने की वकालत की है।
- Written By: गोरक्ष पोफली
राधाकृष्ण विखे पाटिल (सोर्स: सोशल मीडिया)
Radhakrishna Vikhe Patil on NEET scam: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में सामने आई कथित धांधली और पेपर लीक मामलों को लेकर पूरे देश में आक्रोश का माहौल है। इसी बीच, मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने एक बेहद कड़ा और साहसिक रुख अपनाते हुए निजी कोचिंग संस्थानों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की वकालत की है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा है कि सरकार को राज्य के प्रत्येक जूनियर और डिग्री कॉलेज के भीतर ही NEET की तैयारी और कोचिंग को अनिवार्य कर देना चाहिए। मंत्री का मानना है कि इस कदम से न केवल शिक्षा का तेजी से हो रहा व्यापारीकरण रुकेगा, बल्कि गरीब, ग्रामीण और होनहार छात्रों को भी बिना किसी आर्थिक भेदभाव के समान अवसर मिल सकेंगे।
नेताओं और कोचिंग संचालकों की सांठगांठ
अहिल्यानगर में नीट पेपर लीक के तार जुड़ने के बाद मंत्री विखे पाटिल ने इस पूरे रैकेट के पीछे छिपे राजनीतिक चेहरों और कोचिंग संचालकों के नापाक गठजोड़ पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, राज्य में कई राजनेताओं द्वारा शुरू किए गए आर्ट्स और कॉमर्स कॉलेजों को पिछले दरवाजे से निजी कोचिंग संचालकों को सौंप दिया गया है। इस अवैध नेटवर्क और सांठगांठ के जरिए मोटी कमीशनखोरी का गंदा खेल चल रहा है, जो राज्य के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
विखे पाटिल ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि जिन भी कॉलेजों ने अपनी शैक्षणिक व्यवस्था को निजी कोचिंग माफियाओं के हाथों में सौंपा है, उनकी सरकारी मान्यता तुरंत प्रभाव से रद्द की जानी चाहिए। इस विषय की गंभीरता को देखते हुए वे जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से व्यक्तिगत मुलाकात करेंगे और ऐसे संस्थानों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।
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लाखों की फीस वसूलना डकैती
कोचिंग सेंटरों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने उनकी भारी-भरकम फीस को सरेआम डकैती करार दिया। उन्होंने कहा कि दो से तीन लाख रुपये की मोटी रकम वसूल कर अभिभावकों का मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है। आज के दौर में नामी कोचिंग संस्थानों में बच्चों को भेजना पढ़ाई से ज्यादा एक स्टेटस सिंबल बन चुका है, जहां योग्यता के बजाय केवल पैसे को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन अत्यंत प्रतिभाशाली छात्र मुख्यधारा से पिछड़ते जा रहे हैं।
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सरकारी शिक्षकों की जवाबदेही पर उठाए तीखे सवाल
विखे पाटिल ने सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों की कार्यशैली और जवाबदेही को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार इन शिक्षकों को छठा और सातवां वेतन आयोग दे रही है, समय पर पेंशन जैसी सभी जायज मांगें पूरी कर रही है, तो ऐसी क्या नौबत आ गई है कि छात्र कॉलेजों की कक्षाओं को छोड़कर निजी क्लासेस का रुख करने को मजबूर हैं?
मंत्री विखे पाटिल के अनुसार, अगर सरकारी और अनुदानित कॉलेजों के स्तर पर ही पूरी ईमानदारी के साथ नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू करा दी जाए, तो इन कोचिंग माफियाओं की अवैध दुकानें अपने आप बंद हो जाएंगी और देश की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर पारदर्शी और सुलभ बन सकेगी।
