2.5 साल तक रची कारोबारी परिवार की हत्या कर लूट की साजिश, फिर वॉचमैन को मारा, विले पार्ले मर्डर केस बड़ा खुलासा
Vile Parle Watchman Murder Case: मुंबई के विले पार्ले में वॉचमैन मनोज यादव की हत्या और बिजनेसमैन परिवार को लूटने की 2.5 साल पुरानी साजिश का पर्दाफाश हो गया है। पुलिस ने 5 आरोपियों गिरफ्तार किया।
- Written By: आकाश मसने
विले पार्ले वॉचमैन हत्याकांड (प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI)
Vile Parle Watchman Murder Case Conspiracy: मुंबई के पॉश इलाके विले पार्ले (पश्चिम) की अभिजीत रेजिडेंशियल बिल्डिंग में 1 अगस्त की रात हुई वॉचमैन मनोज यादव की हत्या के मामले में जुहू पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए रसोइया और एक बॉलीवुड फिल्म निर्देशक के ड्राइवर समेत कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में जो खुलासे हुए हैं, उसने पुलिस और मृतक के परिजनों के साथ-साथ आरोपियों के मालिकों को भी स्तब्ध कर दिया है।
2.5 साल से रची जा रही थी खौफनाक साजिश
मुंबई पुलिस जांच के अनुसार, इस पूरे हत्याकांड और डकैती का मास्टरमाइंड बिहार के मधुबनी का रहने वाला जोगेश्वर मलिक है। मलिक पीड़ित कारोबारी के घर पिछले 10 वर्षों से कुक के रूप में काम कर रहा था। उसने अलमारी में रखी मोटी कैश रकम और कीमती जेवर देख लिए थे, जिसके बाद उसके मन में लालच आ गया। उसने अपने परिचित और एक प्रसिद्ध बॉलीवुड निर्देशक के ड्राइवर, विजय गोंजारे के साथ मिलकर कारोबारी, उनकी पत्नी और बेटी की हत्या कर पूरा फ्लैट लूटने की साजिश रची।
पुलिस ने बताया कि साजिश का मास्टरमाइंड जोगेश्वर मलिक पिछले 10 सालों से कारोबारी के यहां काम करता था। उसने फ्लैट की डुप्लिकेट चाबी बनवाई और विजय गोंजारे के साथ मिलकर करीब ढाई साल तक लूट की योजना बनाई। विजय गोंजारे एक प्रसिद्ध बॉलीवुड फिल्म निर्देशक का ड्राइवर है।
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जासूसी फिल्मों की तरह काम कर रहे थे आरोपी
पुलिस के हाथों पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने जासूसी फिल्मों की तरह दिमाग लगाया। दोनों ने 6 महीने पहले मोबाइल पर बात करना बंद कर दिया था और प्लान के मुताबिक हर रात करीब 9.30 बजे ड्यूटी खत्म करने के बाद जुहू में अलग-अलग जगहों पर आमने-सामने मिलते थे।
ऐसे होने था लूट के सामन का बंटवारा
योजना को अंजाम देने के लिए जोगेश्वर मलिक ने विजय गोंजारे से 3 और साथी जुटाने को कहा। इसके बाद तय हुआ था कि लूटे गए सामान में से 50 प्रतिशत मलिक को मिलेगा और बाकी 50 प्रतिशत का अन्य 4 आरोपियों में बांटवारा होगा।
मुंबई पुलिस ने कहा कि जब हमने मलिक को पकड़ा तो उसके नियोक्ता बचाव में आ गए और उसके साथ खड़े हो गए, उनका कहना था कि मलिक इसमें शामिल नहीं हो सकता, उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि साजिश असल में उनके पूरे परिवार की लूट और हत्या की थी।
पुलिस मुताबिक मलिक और गोंजारे एक-दूसरे को पहले से जानते थे। गोंजारे पहले जुहू की उसी बिल्डिंग में काम करता था, जहां फिल्म निर्देशक रहते हैं और उसी बिल्डिंग में मलिक के नियोक्ता भी रहते थे, बाद में वह विले पार्ले (पश्चिम) शिफ्ट हो गया था।
वॉचमैन का भरोसा जीतने दिए 500 रुपए
मुंबई पुलिस के अनुसार, आरोपी विजय गोंजारे ने वारदात को अंजाम देने से एक दिन पहले तीनों साथियों का परिचय वॉचमैन मोहन यादव से कराया और उसका भरोसा जीतने के लिए उसे 500 रुपए भी दिए। साथ ही कहा कि वे अगले दिन पार्टी के लिए आएंगे।
वॉचमैन मोहन यादव की गला दबाकर की हत्या
1 अगस्त की रात चारों आरोपी बिल्डिंग में इकट्ठा हुए और वॉचमैन मोहन यादव के साथ शराब पी। उन्होंने उसकी शराब में नशीला पदार्थ मिला दिया था, लेकिन जब उसका असर कम हुआ तो उन्होंने गला दबाकर मनोज यादव की हत्या कर दी। आरोपियों ने उसके हाथ पीछे बांध दिए और शव को पानी की टंकी में डालकर ढक्कन बंद कर दिया।
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ताला नहीं खुला और बच गई कारोबारी परिवार की जान
2 अगस्त की सुबह करीब 4:30 बजे आरोपी गोंजारे और तीनों साथी डुप्लीकेट चाबी लेकर छठी मंजिल पर कारोबारी के फ्लैट पर पहुंचे। किस्मत से डुप्लीकेट चाबी से ताला नहीं खुला। आरोपियों के पास हथौड़े भी थे ताकि जरूरत पड़ने पर लूट की वारदात में इस्तेमाल कर सकें, लेकिन पकड़े जाने के डर से वे भाग निकले।
सुबह जब अगला सिक्योरिटी गार्ड रिलीव करने आया तो टंकी में मनोज यादव लाश देखी। इसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के अनुसार, मलिक और गोंजारे दोनों ने करीब ढाई साल से इस अपराध की योजना बनाने की बात कबूल की है। 2 अगस्त को हत्या का मामला दर्ज किया गया।
मुंबई पुलिस के अनुसार आरोपियों को लगा था कि वे बिना पकड़े लूट की घटना को अंजाम दे देंगे, क्योंकि 10 मंजिला बिल्डिंग में सिर्फ 3 परिवार रहते थे। पहली 2 मंजिलों पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान थे और ज्यादातर आवासीय फ्लैट खाली थे, क्योंकि फ्लैट मालिकों ने रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के चलते घर खाली कर दिए थे।
