वीर सावरकर को भारत रत्न पर सियासत: आनंद दुबे ने मोहन भागवत को घेरा, कहा- जलेबी की तरह गोल-गोल बातें न घुमाएं
Maharashtra Politics: मोहन भागवत के सावरकर को भारत रत्न देने वाले बयान पर शिवसेना (UBT) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आनंद दुबे ने संघ प्रमुख से सरकार को अल्टीमेटम देने की मांग की है।
- Written By: आकाश मसने
आनंद दुबे व मोहन भागवत (सोर्स: सोशल मीडिया)
Anand Dubey On Mohan Bhagwat Statement: स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की मांग एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा मुंबई में दिए गए एक बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। अब इस मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) ने संघ प्रमुख और केंद्र सरकार पर हमला बोला है।
‘गोल-गोल जलेबी न बनाएं भागवत’
शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मोहन भागवत जी, आप इस मुद्दे को गोल-गोल जलेबी की तरह मत घुमाइए। आप हिंदुओं के अग्रज हैं और सरकार आपकी सुनती है। अगर आप वास्तव में चाहते हैं कि सावरकर जी को भारत रत्न मिले, तो सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दीजिए।”
दुबे ने याद दिलाया कि शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने 1966 में पार्टी की स्थापना के समय से ही सावरकर को भारत रत्न देने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि हम पिछले 50 वर्षों से यह मांग कर रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार सत्ता में होने के बावजूद अब तक इस पर फैसला नहीं ले पाई है।
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मोहन भागवत ने क्या कहा था?
दरअसल, संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा था कि यदि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाता है, तो इससे इस सम्मान की प्रतिष्ठा और बढ़ जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे उस कमेटी का हिस्सा नहीं हैं जो यह निर्णय लेती है, लेकिन वे अवसर मिलने पर जिम्मेदारों से यह सवाल जरूर पूछेंगे कि इसमें देरी क्यों हो रही है।
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सावरकर पर क्यों छिड़ी है जंग?
सावरकर को भारत रत्न देने का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में बेहद संवेदनशील रहा है। शिवसेना (UBT) लगातार भाजपा को इस मुद्दे पर घेरती रही है कि केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बाद भी हिंदुत्व के इतने बड़े प्रतीक को अब तक सम्मानित क्यों नहीं किया गया। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस और विपक्षी दल अक्सर सावरकर के इतिहास को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। आनंद दुबे का ताजा बयान दर्शाता है कि आगामी चुनावों से पहले हिंदुत्व और सावरकर के मुद्दे पर श्रेय लेने की होड़ और तेज होने वाली है।
