वसुधैव कुटुंबकम 4.0 में उमड़ी भारी भीड़, तीसरे दिन कानूनी विमर्श और छात्र गतिविधियों का संगम

Vasudhaiva Kutumbakam 4.0 :मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित वसुधैव कुटुंबकम 4.0 कॉन्क्लेव के तीसरे दिन कानूनी विमर्श, मूट कोर्ट प्रतियोगिता और संविधान आधारित चर्चाओं में भारी भीड़ उमड़ी।
Mumbai conclave
Vasudhaiva Kutumbakam 4.0:मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Mumbai Conclave: मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित ‘वसुधैव कुटुंबकम की ओर’ कॉन्क्लेव का तीसरा दिन शनिवार को अत्यंत सफल रहा। पूरे दिन खुली रहने वाली प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में आगंतुकों की उत्साहजनक उपस्थिति दर्ज की गई।

प्रदर्शनी में न्याय और शाश्वत वैश्विक व्यवस्था के लिए प्राचीन भारतीय ज्ञान में निहित परिवार के 12 शाश्वत सिद्धांतों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। साथ ही भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष प्रदर्शनी में संयुक्त परिवार की संगठन क्षमता, संवैधानिक संतुलन और नैतिक शासन जैसे विषयों को प्रमुखता से दर्शाया गया।

कानून के छात्रों ने दिखाया दमखम

विशेष रूप से तैयार किए गए ‘स्टूडेंट इंगेजमेंट ज़ोन’ में मूट कोर्ट के सेमीफाइनल और फाइनल राउंड का आयोजन किया गया। विधि के छात्रों ने वकालत कौशल, कानूनी तर्क और प्रक्रिया की सटीकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। फाइनल राउंड के उपरांत प्रतिभागियों के सम्मान में एक औपचारिक समारोह भी आयोजित किया गया।

मौलिक अधिकारों पर गहन विमर्श

मथुरादास हॉल में आयोजित पैनल-3 में ‘मौलिक अधिकारों’ पर विस्तृत और सारगर्भित चर्चा हुई। बॉम्बे हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रफीक दादा, जाल अंध्यारुजिना, प्रदीप संचेती और चेतन कपाड़िया ने मौलिक अधिकारों के उद्भव, न्यायिक व्याख्या और वर्तमान चुनौतियों पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।

संविधान और जीवन पर विचार-मंथन

दोपहर बाद आयोजित पैनल-4 में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी.एन. श्रीकृष्णा, वरिष्ठ अधिवक्ता संजय उपाध्याय, नौशाद इंजीनियर सहित अन्य विशेषज्ञों ने कानून और उभरते क्षेत्रों के बीच अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए। शाम के सत्र में राजनीति, व्यापार और पर्यावरण जैसे विषयों पर पॉडकास्ट चर्चाएं भी आयोजित की गईं। यह कॉन्क्लेव 22 जनवरी तक चलेगा और प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क है।

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