मनमाड स्टेशन परिसर में टैक्सी-रिक्शा पर पाबंदी से यात्री परेशान, सुहास कांदे ने दी आंदोलन की चेतावनी

MLA Suhas Kande: शिवसेना ने रेलवे अधिकारियों द्वारा मनमाड स्टेशन पर टैक्सी और रिक्शा की पाबंदी के खिलाफ आवाज उठाई। विधायक सुहास कांदे ने आंदोलन की चेतावनी दी है। पढ़ें पूरी खबर।
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MLA Suhas Kande:शिवसेना ने रेलवे (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Manmad Railway Restrictions: रेलवे प्रशासन एक ओर जहां यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर मनमाड में अधिकारियों के मनमाने फैसलों ने हजारों यात्रियों और स्थानीय व्यवसायियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

रेलवे अधिकारियों ने स्टेशन परिसर के बाहर रिक्शा और टैक्सी खड़ी करने पर अचानक पाबंदी लगा दी है। इस निर्णय से न केवल यात्रियों को भारी असुविधा हो रही है, बल्कि सैकड़ों टैक्सी और रिक्शा चालकों के परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

ऐतिहासिक व्यवस्था पर अचानक रोक

मनमाड रेलवे स्टेशन, भुसावल मंडल का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है, जहाँ से प्रतिदिन 125 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। शिरडी और शनि शिंगणापुर के निकट होने के कारण देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। चूंकि बस स्टैंड स्टेशन से एक किलोमीटर से अधिक दूर है और प्रसिद्ध गुरुद्वारा भी काफी दूरी पर स्थित है, इसलिए यात्रियों को रिक्शा और टैक्सी की अत्यधिक आवश्यकता होती है। ब्रिटिश काल से ही यहां यात्रियों की सुविधा के लिए पहले तांगे और पिछले 50 वर्षों से रिक्शा और टैक्सी स्टैंड की व्यवस्था थी। लेकिन अब प्रशासन ने अचानक इन वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है और कार्रवाई की चेतावनी दी है।

मनमाड स्टेशन पर टैक्सी और रिक्शा की पाबंदी

वृहद जन-आक्रोश और राजनीतिक विरोध

रेलवे प्रशासन के इस कठोर रुख के कारण शहर के विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों में भारी रोष है। यात्रियों का आरोप है कि अधिकारी जमीनी हकीकत पर विचार किए बिना मनमाने निर्णय ले रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय विधायक सुहास अण्णा कांदे ने कड़ा रुख अपनाया है।

मनमाड स्टेशन पर टैक्सी और रिक्शा की पाबंदी

रेलवे अधिकारियों की तानाशाही के खिलाफ शिवसेना मुखर

उन्होंने कहा, “रेलवे प्रशासन तुरंत अपना फैसला वापस ले और पूर्व की भांति रिक्शा और टैक्सी स्टैंड को अनुमति दे। यदि इस निर्णय को नहीं बदला गया, तो शिवसेना की ओर से तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।” रेलवे प्रशासन के इस कदम ने शहर की कानून-व्यवस्था और जनसुविधाओं को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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