मैराथन रद्द, राजनीतिक खेल तेज; हितेंद्र ठाकुर और भाजपा-बविआ के बीच सियासी आरोप-प्रत्यारोप
Vasai-Virar News: वसई-विरार में मनपा चुनावों को लेकर मैराथन रद्द कर दी गई है। पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर और भाजपा-बविआ के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए है।
- Written By: सोनाली चावरे
वसई-विरार मैराथन रद्द (pic credit; social media)
Vasai-Virar Marathon Cancelled: दिसंबर में होने वाली प्रतिष्ठित मैराथन इस साल रद्द कर दी गई है। मनपा ने इसका हवाला मनपा चुनावों को बताया, लेकिन इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू कर दी हैं। कहा जा रहा है कि सत्तारूढ़ भाजपा यह कदम पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर के लिए राजनीतिक दुविधा पैदा करने के मकसद से उठा रही है।
वसई-विरार में आगामी मनपा चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला मनपा चुनाव होगा। राजनीतिक दल अब अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में जुट गए हैं। गड्ढों वाली सड़कों के मुद्दे पर भी भाजपा और बहुजन विकास आघाड़ी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
मैराथन का आयोजन पिछले 12 वर्षों से लगातार होता आया था। जब बविआ सत्ता में थी, तब इसे शहर में खेलप्रेमियों के बीच एक महत्वपूर्ण पहल माना गया। धावकों और नागरिकों ने इसे हमेशा उत्साह से सराहा। मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे शहरों से भी धावक भाग लेते थे। पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर की बविआ हमेशा इस मैराथन पर नजर रखती रही।
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लेकिन इस साल चुनाव का हवाला देते हुए मैराथन रद्द कर दी गई। ठाकुर ने कहा कि यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने चेताया कि इससे एथलीट और धावक निराश होंगे और वसई-विरार की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्रभावित होगी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह केवल मैराथन रद्द करने का मामला नहीं है। पहले भी मैराथन के दौरान रंगों को लेकर राजनीति हुई थी। पहले पीला और हरा रंग इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद सफेद और भगवा रंग लगाया गया, जिससे भी राजनीतिक बहस छिड़ गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा यह रणनीति इसलिए अपना रही है ताकि बविआ और पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर के बीच चुनावी माहौल में दुविधा पैदा की जा सके। कुछ महीने पहले ही कई बविआ नेता और कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हुए थे। अब मैराथन रद्द करना भी इसी सियासी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
वसई-विरार के खेलप्रेमियों और धावकों के लिए यह फैसला निराशाजनक है, लेकिन राजनीतिक सियासत ने इसे सनसनीखेज मामला बना दिया है।
