संजय राउत और उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो: पीटीआई)
मुंबई. महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव अभी घोषित नहीं हुए हैं लेकिन सूबे की सभी सियासी पार्टियों की चुनावी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। खासतौर पर कांग्रेस नीत महाविकास आघाड़ी (मविआ) में लोकसभा चुनाव के तजुर्बे से सबक लेते हुए इस बार सीटों के बंटवारे पर मंथन शुरू हो गया है। इसी के तहत शनिवार को मुंबई के ट्राइडेंट होटल में आयोजित बैठक में मुंबई की 36 विधानसभा सीटों की समीक्षा की गई। इस दौरान तीनों पार्टियों के मुंबई के प्रमुख नेताओं ने मुंबई में अपने लिए अनुकूल सीटों को लेकर प्रस्ताव पेश किया। सूत्रों का ऐसा दावा है कि मुंबई में मविआ में शिवसेना (उद्धव गुट) विधानसभा चुनाव में बड़ा भाई सिद्ध होगा।
शनिवार की बैठक में शिवसेना (उद्धव गुट) शिवसेना सांसद व प्रवक्ता संजय राऊत तथा नेता व विधायक अनिल परब तो वहीं कांग्रेस से सांसद व मुंबई प्रदेश अध्यक्ष वर्षा गायकवाड, विधायक असलम शेख और भाई जगताप तथा राकां शरदचंद्र पवार से विधायक जितेंद्र आव्हाड एवं पार्टी की मुंबई अध्यक्ष राखी जाधव शामिल हुईं। इस बैठक में उद्धव गुट ने मुंबई की लगभग 20 सीटों पर अपना दावा मजबूती के साथ पेश किया है तो वहीं कांग्रेस ने 15 सीटों एवं राकां शरदचंद्र पवार ने 7 सीटों पर दावा ठोंका है।
उद्धव गुट का दावा है कि मुंबई में उसका हमेशा से वर्चस्व रहा है। इस लिहाज से महाराष्ट्र की सत्ता में वापसी के लिए मुंबई की ज्यादा से ज्यादा सीटों पर उसके उम्मीदवारों को मौका मिलना चाहिए। उद्धव गुट का कहना है कि 2019 विधानसभा चुनाव में किसी विशेष पार्टी द्वारा जीती गई सीटें उसी पार्टी के पास रहनी चाहिए। 2019 में अविभाजित शिवसेना ने शहर में 14 सीटें जीती थीं। अब मुंबई में उद्धव गुट के पास 8 और शिंदे गुट के पास 6 विधायक हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 4, एनसीपी ने 1 और एसपी ने 1 सीट जीती।
मविआ की बैठक में मौजूद सभी घटक दलों ने उद्धव गुट को मुंबई में बड़ा भाई स्वीकार कर लिया है। ऐसे संकेत बैठक में मौजूद राकां शरद पवार के नेता व विधायक जितेंद्र आव्हाड ने दिए हैं। बैठक के बाद राकां के जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि मुंबई में उद्धव की शिवसेना का गढ़ है, इसलिए स्वाभाविक रूप से वे बड़े भाई की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इसका फैसला बाद में किया जाएगा।
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सूत्रों के मुताबिक मुंबई में एमवीए के भीतर कुछ सीटों की अदला-बदली की जाएगी। उदाहरण के लिए, चाँदीवली सीट, जो शिवसेना ने जीती थी, नसीम खान के लिए कांग्रेस को दी जाएगी, क्योंकि विधायक दिलीप लांडे शिवसेना के शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। इसी तरह, बांद्रा पूर्व सीट, जिसे कांग्रेस ने विधायक जीशान सिद्दीकी के साथ जीता था, वह अब यूबीटी शिवसेना को दी जा सकती है, क्योंकि सिद्दीकी पार्टी छोड़ने के बाद एनसीपी के अजीत गुट से चुनाव लड़ सकते हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है मुंबई में मविआ में 18-14 और 4 का फार्मूला लागू हो सकता है। जिसके तहत उद्धव गुट को कम से कम 18 सीटें मिलने का पूरा विश्वास है। तो वहीं कांग्रेस को 12 से 14, राकां शरदचंद्र पवार 3 से 4 और सपा को 1 सीट मिल सकती है।
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गौरतलब हो कि इस बैठक में खासतौर पर अणुशक्ति नगर और बांद्रा-पूर्व विधानसभा क्षेत्र को लेकर मतभेद देखने को मिले। इनमें अणुशक्ति नगर पर मविआ के तीनों प्रमुख घटक दलों (कांग्रेस, उद्धव गुट और राकां शरदचंद्र पवार) ने दावा ठोका है तो वहीं बांद्रा-पूर्व पर कांग्रेस व उद्धव गुट के बीच मतभेद देखने को मिला।
महाराष्ट्र की सत्ता से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्ववाली महायुति सरकार को बेदखल करने के लिए आगामी विधानसभा चुनाव में मुंबई में उद्धव गुट को ज्यादा सीटें मिलनी ही चाहिए। क्योंकि लोकसभा चुनाव में मुंबई में उद्धव का दम देखने को मिला था। ऐसा राजनीति के जानकारों का मानना है। मुंबई की 6 में से 4 सीटों पर उद्धव गुट के उम्मीदवार चुनाव लड़े थे। इनमें दक्षिण मुंबई लोकसभी सीट से उद्धव गुट के अरविंद सावंत, तो वहीं दक्षिण मध्य से अनिल देसाई तथा उत्तर पूर्व से संजय दीना पाटिल विजयी हुए थे। इसी तरह उत्तर मध्य मुंबई में कांग्रेस की उम्मीदवार वर्षा की जीत में उद्धव गुट का महत्वपूर्ण योगदान देखने को मिला था जबकि उत्तर पश्चिम मुंबई में उद्धव गुट के उम्मीदवार अमोल कीर्तिकर जीतते-जीतते हार गए थे। दूसरी तरफ एक फिर से महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे पूर्व मुख्यमंत्री तथा शिवसेना (उद्धव गुट) के पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे को मुंबई में ज्यादा सीटें हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ताकि मुंबई में ज्यादा उम्मीदवार लड़ाकर और सीटें जीतकर ज्यादा विधायक की शर्त को पूरा करने में सहूलियत हो।
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विधानसभा के लिए मुंबई की सीटों के बंटवारे के मामले में कांग्रेस की मुंबई प्रदेश की अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा गायकवाड की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने का उन पर दबाव है, क्योंकि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले हुए सीटों के बंटवारे से वर्षा बेहद नाराज हुई थी। उन्होंने कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले पर मुंबई के नेताओं की उपेक्षा करने तथा कांग्रेस का पक्ष मजबूती से नहीं रखने का आरोप लगाया था।