‘मुझे शिवसेना का अध्यक्ष नहीं रहना….’, उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान, इस्तीफे के लिए रखी एक बड़ी शर्त
Uddhav Thackeray Statement: उद्धव ठाकरे ने पार्टी के स्थापना दिवस पर भावुक बयान देते हुए कहा कि अगर शिवसैनिक चाहें तो वह अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने एक बड़ी शर्त भी रखी है।
- Written By: गोरक्ष पोफली
उद्धव ठाकरे का बयान (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Uddhav Thackeray Ready To Resign Shiv Sena President: शिवसेना यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक भावुक और आक्रामक भाषण देते हुए महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। सांसदों की संभावित बगावत के बीच, ठाकरे ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि शिवसैनिकों को ऐसा लगता है, तो वह पक्ष प्रमुख पार्टी अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।
यह बयान उन खबरों के बीच आया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि ठाकरे गुट के छह सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने की तैयारी में हैं। इन सांसदों ने आरोप लगाया था कि उद्धव ठाकरे उनसे मिलते नहीं हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकरे ने कहा, मुझ पर कार्यकर्ताओं को समय न देने का आरोप लगाया जा रहा है। यदि शिवसैनिकों को भी ऐसा ही लगता है, तो मैं पद छोड़ने के लिए तैयार हूँ। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि उन्हें सत्ता का मोह होता, तो वह बहुत पहले ही विधान परिषद के सदस्य बन गए होते। वह पिछले 13-14 वर्षों से इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं।
इस्तीफे के साथ जुड़ी बड़ी शर्त
उद्धव ठाकरे ने इस्तीफे की पेशकश तो की, लेकिन इसके साथ एक कड़ी शर्त भी रखी। उन्होंने कहा, मैं यह सोने जैसी शिवसेना किसी गद्दार या चोर के हाथ में नहीं सौंपूँगा। उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि वह किसी निष्ठावान शिवसैनिक को पक्ष प्रमुख बनाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि वह चुनौतियों से खबराने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि जिम्मेदारी स्वीकार करने वाले इंसान हैं।
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मतदाताओं से मांगी माफी
सांसदों के दलबदल पर दुख व्यक्त करते हुए ठाकरे ने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि इन सांसदों ने उनके आह्वान और हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे के नाम पर वोट पाए थे, लेकिन अब वे पार्टी छोड़ रहे हैं।
अंत में, उन्होंने वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि लोगों का लोकतंत्र से विश्वास उठ रहा है, जो देश को अराजकता की ओर ले जा सकता है। उन्होंने संकल्प लिया कि वह शिवसैनिकों की इच्छा के अनुसार ही भविष्य का निर्णय लेंगे।
