एक-दो नहीं 5वीं बार शिवसेना में बगावत! जानें बालासाहेब के दौर से शिंदे तक कब-कब टूटी पार्टी
Shiv Sena Split: उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों की बगावत ने शिवसेना के भविष्य पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह शिवसेना में पांचवीं बगावत है। जानिए 1966 से अब तक पार्टी के टूटने का पूरा इतिहास।
- Written By: आकाश मसने
शिवसेना में बगावत का इतिहास (सोर्स: AI)
Shiv Sena Split History: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। लोकसभा चुनाव 2024 में शानदार प्रदर्शन के बाद माना जा रहा था कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी खोई हुई जमीन वापस पा चुके हैं। लेकिन अब उनके 9 में से 6 सांसद पाला बदलकर एकनाथ शिंदे कैंप में जाने की तैयारी कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह उद्धव ठाकरे के राजनीतिक अस्तित्व के लिए अब तक का सबसे बड़ा और गहरा आघात साबित होगा।
ऐसा नहीं है कि शिवसेना में यह पहली बगावत है। शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे द्वारा 1966 में शुरू की गई इस पार्टी ने अपने 50 साल के इतिहास में कई बार बगावत और फूट का सामना किया है। आइए जानते हैं अब तक शिवसेना कब-कब और किन बड़े नेताओं की वजह से टूटी है।
पहली टूट: 1991 में छगन भुजबल ने की थी बगावत
शिवसेना में पहली बड़ी फूट ओबीसी नेता छगन भुजबल की अगुवाई में हुई थी। ओबीसी आरक्षण के मुद्दे से परेशान भुजबल ने 18 विधायकों के साथ शिवसेना में बगावत कर दी थी और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। बाद में, 1999 में जब शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना की तो छगन भुजबल भी उनके साथ नई पार्टी में शामिल हो गए।
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बालासाहेब ठाकरे के साथ छगन भुजबल (सोर्स: साेशल मीडिया)
दूसरी टूट: 2005 नारायण राणे ने भी छोड़ा साथ
कोंकण के कद्दावर नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने 2005 में शिवसेना छोड़ दी थी और उद्धव ठाकरे की लीडरशिप को चैलेंज किया था। यह शिवसेना में दूसरी बड़ी बगावत थी। नारायण राणे के साथ पार्टी के 12 से ज्यादा विधायक चले गए थे। उसके बाद वे सभी कांग्रेस में शामिल हो गए।
तीसरी टूट: जब राज ठाकरे शिवसेना से हुए अलग
शिवसेना में तीसरी बगावत साल 2005-06 में हुई थी। यह बगावत किसी और ने नहीं बल्कि बालासाहेब ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने की थी। राज ठाकरे 27 नवंबर 2005 को शिवसेना से अलग हो गए थे। राज ने आरोप लगाया था कि उद्धव ठाकरे को प्रमोट करने के लिए उन्हें साइडलाइन किया जा रहा है। इसके बाद, उन्होंने 9 मार्च 2006 को अपनी अलग पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का गठन किया था।
बालासाहेब ठाकरे के साथ राज ठाकरे व उद्धव ठाकरे (सोर्स: साेशल मीडिया)
चौथी टूट: एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी पर कब्जा
शिवसेना में सबसे बड़ी और चौथी बार टूट साल 2022 में हुई थी। एकनाथ शिंदे ने जून 2022 में उद्धव ठाकरे से बगावत कर भाजपा से हाथ मिला लिया था। वे अपने साथ पार्टी के 40 विधायक और 12 सांसद ले गए थे। इस टूट को सबसे बड़ा इसलिए माना गया क्योंकि एकनाथ शिंदे ने जब बगावत की थी तब उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे और शिंदे खुद एक मंत्री थे। सत्ता में रहते हुए शिंदे ने बगावत की और इसका असर ये हुआ कि उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। साथ ही पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न भी एकनाथ शिंदे को मिल गया। हालांकि इसे लेकर कानूनी लड़ाई अब भी जारी है।
जून 2022 में हुई बगावत के समय गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल में विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया)
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पांचवीं टूट: अब 6 सांसद छोड़ेंगे साथ
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में टूट के बाद साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे गुट से 9 उम्मीदवार चुनाव जीतकर सांसद बने थे। अब इसमें से 6 सांसद ठाकरे से बगावत कर शिंदे कैंप में जाने को तैयार है।
