4 साल बाद फिर साथ आएंगे शिंदे-ठाकरे? BJP की बढ़ती ताकत से डरी शिव सेना…महाराष्ट्र में क्या खिचड़ी पक रही?
Uddhav Thackeray Shinde Camp Alliance: महाराष्ट्र में होगा बड़ा उलटफेर? भाजपा के बढ़ते ग्राफ से डरी दोनों शिवसेना। अब्दुल सत्तार के दावे के बाद क्या फिर एक होंगे उद्धव और शिंदे? जानिए सियासी मायने।
- Written By: गोरक्ष पोफली
एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे (सोर्स: एआई फोटो)
Uddhav Thackeray Eknath Shinde Reunion Rumors: महाराष्ट्र की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ दोस्ती, दुश्मनी और डर का एक रोमांचक मेल दिखाई दे रहा है। कभी भारतीय जनता पार्टी को कमलाबाई कहकर तंज कसने वाली शिवसेना आज खुद अपने अस्तित्व को बचाने के लिए छटपटा रही है। सवाल बड़ा है कि क्या भाजपा से डरकर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे फिर एक साथ आएंगे?
भाजपा का विशालकाय उभार और शिवसेना का डर
सियासत के इस शतरंज में भाजपा अब बड़े भाई की भूमिका से आगे निकल कर अब बॉस वाले तेवर में आ गई है। आंकड़ों की बाजीगरी देखें तो 1990 में शिवसेना 52 सीटों के साथ भाजपा (42 सीटें) से बड़ी थी। 1995 में जब पहली बार गठबंधन की सरकार बनी, तब भी शिवसेना 73 सीटों के साथ शीर्ष पर थी। लेकिन 2009 वह टर्निंग पॉइंट था, जहाँ पहली बार भाजपा (46) शिवसेना (44) से आगे निकल गई। आज स्थिति यह है कि 2024 तक आते-आते भाजपा 132 के आंकड़े को छू रही है, जबकि शिवसेना दो फाड़ होकर 57 पर शिंदे गुट और 20 सीटों पर ठाकरे गुट में सिमट गई है। दोनों की सीटों को जोड़कर भी यदि देखें तो भी भाजपा बहुत आगे जा चुकी है। भाजपा की इस दोगुनी-चौगुनी प्रगति ने दोनों सेनाओं के मन में डर पैदा कर दिया है।
वाशिंग मशीन और सांगठनिक ताकत का जादू
भाजपा की सफलता का राज उसकी चौबीसों घंटे की सक्रियता और आरएसएस का मजबूत आधार है। वह विपक्ष के नेताओं को अपनी वाशिंग मशीन में धोकर पार्टी की अलमारी में ट्रॉफी जैसी सजा लेती है, जिससे दूसरे दल केवल चुनाव के वक्त जागते रह जाते हैं। इसी संगठनात्मक कमजोरी के कारण आज नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी बेचैनी है।
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क्या फिर होगा ठाकरे-शिंदे मिलन?
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच चर्चा गर्म है कि क्या दोनों शिवसेना का एकीकरण होगा? सूत्रों के अनुसार, मातोश्री से तुरंत आने का आमंत्रण भी दिया जा चुका है। हालांकि, एकनाथ शिंदे भाजपा के साथ सत्ता का सुख भोग रहे हैं और उद्धव ठाकरे का गुट अपनी एकजुटता बनाए रखने में भी संघर्ष कर रहा है।
एक होने में ज्यादा समय नहीं, अब्दुल सत्तार का बड़ा दावा
शिवसेना के पुनर्मिलन की संभावनाओं को लेकर शिंदे गुट के नेता अब्दुल सत्तार ने बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि यह दोनों गुटों के साथ आने का सही समय है। राज्य में भाजपा के बढ़ते वर्चस्व और शिवसेना की पारंपरिक सीटों, जैसे छत्रपति संभाजीनगर, पर भाजपा द्वारा अपना दावा ठोकने की वजह से दोनों गुटों में हलचल तेज है। सत्तार के अनुसार, यदि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस दिशा में फैसला लेते हैं, तो दोनों पार्टियों के एक होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
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क्या मेल-मिलाप संभव है?
सियासी गलियारों में सवाल है कि अगर एक-दूसरे के विरोध में इतनी बयानबाजी और वर्षों के विरह के बाद चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ मिलन संभव है, तो जो कुछ वर्षों पूर्व ही निकले हैं, उनके साथ मेल-मिलाप भी संभव है। फिलहाल, संजय राउत और अब्दुल सत्तार जैसे नेता बयानों से सुर्खियां तो बटोर रहे हैं, लेकिन क्या वे दोनों गुटों को एक मंच पर ला पाएंगे? महाराष्ट्र की राजनीति का यह सस्पेंस अभी जारी है, जहाँ एक ओर भाजपा का अजेय रथ है और दूसरी ओर अपनी पहचान बचाने की जुगत में लगी शिवसेना।
अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा नामक बड़ी मछली सेना को निगलती है या निगले जाने के डर से ही क्यों न हो पर ठाकरे और शिंदे का भरत-मिलाप होता है। क्या दो छोटी मछलियां एक होकर इस बड़ी मछली को चित कर पाएंगी?
