पानी तो मिला, भुगतान अटका; ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा; छत्रपति संभाजीनगर जलकर विवाद गहराया

Sambhajinagar Jayakwadi Dam: संभाजीनगर मनपा पर जायकवाड़ी बांध के पानी के बदले 340 करोड़ रुपये से अधिक जलकर बकाया है। 24 वर्षों से वसूली न होने पर ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर आपत्ति दर्ज की गई है।
Water supplied but payment stalled; audit report reveals; Chhatrapati Sambhajinagar water tax dispute intensifies.
संभाजीनगर मनपा, जलकर बकाया, (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sambhajinagar Municipal Corporation: छत्रपति संभाजीनगर मनपा द्वारा जायकवाड़ी बांध से आपूर्ति किए जाने वाले पानी के एवज में पांच ग्राम पंचायतों पर 340 करोड़ 23 लाख 90 हजार 739 रुपये की जलकर बकाया राशि जमा हो गई है। वर्ष 2002 से लेकर अब तक 24 वर्षों में यह राशि लगातार बढ़ती रही, लेकिन महानगरपालिका प्रशासन इसे वसूल करने में असफल रहा है। मार्च 2024 तक की लेखा परीक्षण रिपोर्ट में इस मामले पर गंभीर आपत्ति दर्ज करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बकाया राशि की वसूली के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इसके कारण महानगरपालिका को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि दूसरी ओर उसे जायकवाड़ी बांध से पानी लेने के लिए जल संसाधन विभाग को नियमित शुल्क का भुगतान करना पड़ता है। शहर को वर्ष 1982 से जायकवाड़ी बांध से पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है।

बाद में सूखे जैसी परिस्थितियों और पानी की कमी को देखते हुए पैठण तहसील के कुछ गांवों को भी महानगरपालिका की मुख्य पाइपलाइन से पानी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। इसके तहत संबंधित ग्राम पंचायतों से जलकर वसूल किया जाना था। हालांकि पानी की आपूर्ति तो लगातार जारी रही, लेकिन शुल्क की नियमित वसूली नहीं हो सकी।

परिणामस्वरूप बकाया राशि वर्ष दर वर्ष बढ़ती गई और अब 340 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। लेखा परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार इसारवाड़ी, कृष्णापुर, ढोरकीन, बिडकीन और धनगांव ग्राम पंचायतों को पिछले दो दशकों से अधिक समय से महानगरपालिका की पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

नोटिस के बाद भी नहीं किया गया अमल

लेखा परीक्षण में यह भी सामने आया है है कि बकाया राशि की वसूली के लिए कई बार जलापूर्ति बंद करने संबंधी नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद वास्तविक कार्रवाई नहीं हो सकी, रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण प्रशासन कठोर कदम उठाने से पीछे हटता रहा, परिणामस्वरूप बकाया राशि लगातार बढ़ती गई और आज यह सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। महानगरपालिका को जायकवाड़ी बांध से पानी उठाने के लिए जल संसाधन विभाग को निर्धारित शुल्क का नियमित भुगतान करना पड़ता है। यदि भुगतान में देरी होती है तो विभाग द्वारा कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है इसके विपरीत ग्राम पंचायतों से जलकर वसूली के मामले में प्रशासन की उदासीनता लगातार सामने आती रही है।

17 जल कनेक्शन धारकों पर 71 करोड़ देनदारी

वर्ष 2015-16 से 2023-24 की अवधि के दौरान जायकवाड़ी निर्माण विभाग की लेखा परीक्षण रिपोर्ट में एक और गंभीर मामला उजागर हुआ है। 22 ग्राम पंचायतों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों तथा शासकीय और अर्धशासकीय कार्यालयों को दिए गए जल कनेक्शनों की जांच के दौरान पाया गया कि 17 कनेक्शन धारकों पर वर्ष 2014-15 से अब तक 71 करोड़ 2 लाख 1 हजार 842 रुपये की जलकर बकाया राशि जमा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बकाया राशि की वसूली के लिए भी प्रशासन ने अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। इसके कारण राजस्व वसूली प्रभावित हुई है और महानगरपालिका को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

340 करोड़ रुपये की ग्राम पंचायतों की बकाया राशि और 71 करोड़ रुपये से अधिक की अन्य बकाया वसूली को लेकर लेखा परीक्षण रिपोर्ट ने संभाजीनगर  महानगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि समय पर प्रभावी कार्रवाई की जाती तो इतनी बड़ी बकाया राशि जमा नहीं होती।

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