उद्धव- राज की युति ने पकड़ी रफ्तार! आज विधायकों- सांसदों संग बैठक, बदल सकता है समीकरण
Mumbai News: उद्धव और राज ठाकरे की मुलाकात से महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। BMC चुनाव से पहले दोनों भाइयों की बढ़ती नजदीकियां मराठी वोटों का ध्रुवीकरण कर बड़ा राजनीतिक बदलाव ला सकती हैं।
- Written By: सोनाली चावरे
राज- उद्धव ठाकरे (pic credit; social media)
Maharashtra Politics: निकाय चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई सरगर्मी देखी जा रही है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे की नजदीकियों ने गठबंधन की अटकलों को हवा दे दी है। बुधवार को दोनों भाइयों की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
इस मुलाकात के बाद राज ठाकरे ने गुरुवार को अपने निवास शिवतीर्थ पर पार्टी की कोर कमेटी की बैठक बुलाई और पदाधिकारियों से राय जानी। वहीं उद्धव ठाकरे भी शुक्रवार को मातोश्री में विधायकों, सांसदों और जिला प्रमुखों के साथ बैठक कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में निकाय चुनाव, खासकर बीएमसी चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है।
मनसे नेता बाला नंदगांवकर ने कहा कि बुधवार की मुलाकात राज की मां की पहल पर हुई थी और यह मुलाकात करीब 10 मिनट तक चली। लेकिन इस दौरान दोनों भाइयों के बीच क्या चर्चा हुई, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। उन्होंने साफ किया कि अभी तक किसी भी तरह का औपचारिक गठबंधन नहीं हुआ है। फिलहाल दोनों दल अलग-अलग ही काम कर रहे हैं।
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर ठाकरे बंधु साथ आते हैं तो मराठी वोट बैंक का ध्रुवीकरण हो सकता है। इससे बीएमसी चुनाव सहित राज्य के अन्य चुनावों में समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। यही वजह है कि उद्धव ठाकरे की शुक्रवार की बैठक पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
भाजपा नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ठाकरे परिवार का आंतरिक मामला बताया। भाजपा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि अगर दोनों भाई साथ आते हैं तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने भी कहा कि यह उनका पारिवारिक मामला है, तीसरे पक्ष को इसमें दखल नहीं देना चाहिए।
वहीं भाजपा के नवनाथ बन ने व्यंग्य करते हुए कहा कि उद्धव-राज की मुलाकात शायद राम-भरत की मुलाकात जैसी रही होगी, या फिर महाभारत के कौरव-पांडव जैसी। उन्होंने कहा कि अगर दोनों नेता साथ आते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
फिलहाल गठबंधन पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या उद्धव महाविकास आघाड़ी से अलग होंगे या फिर राज कांग्रेस के साथ हाथ मिलाएंगे। इस पर नंदगांवकर ने कहा कि यह विचारधारा और नीति का मामला है और अंतिम फैसला दोनों नेताओं पर निर्भर करेगा।
