सपा नेता अबू आजमी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Abu Azmi On BJP: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अबू आजमी ने देश की वर्तमान स्थिति और विपक्षी नेताओं पर हो रही कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र को कुचलने और विपक्ष को पूरी तरह समाप्त करने की साजिश रची जा रही है।
पश्चिम बंगाल में ईडी (ED) की छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए अबू आजमी ने कहा कि देश में एक ऐसी मुहिम चल रही है जहां विपक्ष का अस्तित्व ही मिटा देने की कोशिश है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, “चाहे देश बर्बाद हो जाए या आने वाली पीढ़ी कर्ज में डूब जाए, सत्ता पक्ष को बस अपनी एक पार्टी का राज चाहिए।” उन्होंने गिरती कानून-व्यवस्था और सरकारी ‘मनमानी’ को लेकर जनता से अपील की कि वे गांधी और अंबेडकर के सिद्धांतों पर चलकर ऐसे लोगों को सबक सिखाएं।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के राहुल गांधी और उमर खालिद से जुड़े बयानों पर आजमी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इनकी मंशा तो सबको ‘जहर खिलाकर’ खत्म करने और सिर्फ भाजपा को बचाए रखने की है। वहीं, मंत्री नितेश राणे को ‘नफरत का पुजारी’ बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार सही होती तो उन्हें अब तक सस्पेंड कर दिया गया होता। उन्होंने आरोप लगाया कि राणे जैसे नेताओं का एकमात्र मकसद हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण करना है।
सपा विधायक रईस शेख द्वारा बगावत किए जाने के सवाल पर आजमी ने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने इसे ‘सत्ता का लालच’ करार देते हुए कहा, “छोटी हांडी में जल्दी उबाल आता है।” उन्होंने कटाक्ष किया कि राजनीति में लोग शोहरत और ताकत की चाहत में अपनों के साथ भी दगा करने से पीछे नहीं हटते।
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बीएमसी चुनाव के करीब आते ही उर्दू भाषा पर छिड़े विवाद पर आजमी ने राज ठाकरे के साथियों को घेरा। उन्होंने खुलासा किया कि विरोध करने वाले लोग खुद उर्दू में हैंडबिल छाप रहे हैं, जिसे उन्होंने ‘मुँह में राम, बगल में छुरी’ की नीति बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव विकास, साफ पानी, मुफ्त बिजली और गरीबों को छत दिलाने के मुद्दों पर होना चाहिए, न कि धर्म और भाषा के नाम पर।
उमर खालिद और शरजील इमाम का जिक्र करते हुए आजमी ने न्यायपालिका और सरकार से सवाल किया कि जमानत जो एक मौलिक अधिकार है, उससे वंचित क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और कानून का निर्वाहन निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए।