तुकाराम मुंढे के निशाने पर अब सेलिब्रिटी, भ्रामक विज्ञापनों पर होगी सख्त कार्रवाई, धोखे से बचाने की पहल
Tukaram Mundhe : महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने भ्रामक विज्ञापनों और झूठे उत्पाद दावों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। आयुक्त तुकाराम मुंढे ने यह स्पष्ट किया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Tukaram Mundhe (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Maharashtra FDA: उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों और झूठे उत्पाद दावों से बचाने के लिए खाद्य व औषधि प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि फर्जी या गुमराह करने वाले उत्पादों का प्रचार करने वाले सेलिब्रिटी भी अब कार्रवाई से नहीं बच पाएंगे।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 सहित विभिन्न कानूनों के तहत ऐसे मामलों में जुर्माना, कारावास, विज्ञापन पर प्रतिबंध और उत्पाद को बाजार से वापस लेने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही भ्रामक विज्ञापनों और अवैध उत्पादों के खिलाफ अभियान को और अधिक सख्ती से लागू किया जाएगा।
झूठे दावों वाले उत्पादों का प्रचार महंगा पड़ेगा
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के अनुसार यदि कोई सेलिब्रिटी ऐसे उत्पाद का प्रचार करता है, जिसके दावे भ्रामक, झूठे या वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। विभाग प्रत्येक विज्ञापन की जांच करेगा और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कंपनियों के साथ-साथ प्रचार करने वाले व्यक्तियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। मुंढे ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कड़े प्रावधान मौजूद हैं।
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जुर्माना और विज्ञापन प्रतिबंध तक की चेतावनी
यदि कोई विज्ञापन उपभोक्ताओं को गुमराह करता है या गलत जानकारी देकर उत्पाद बेचने का प्रयास करता है, तो संबंधित व्यक्ति और संस्था दोनों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है। उपभोक्ता अपने नुकसान की भरपाई की मांग भी कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारत में भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कई कानून लागू हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, भारतीय दंड संहिता, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के नियम और ड्रग्स व कॉस्मेटिक्स अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में कार्रवाई की जा सकती है। विशेष रूप से खाद्य पदार्थों और दवाओं से जुड़े झूठे दावों को गंभीरता से लिया जाएगा।
चलाया जा रहा औषधि व जादूटोना विरोधी विशेष अभियान
एफडीए आयुक्त ने कहा कि राज्यभर में ‘औषधि व जादूटोना विरोधी (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954’ के तहत विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत भ्रामक विज्ञापनों, अवैध दवाओं के उत्पादन और बिक्री और लोगों को भ्रमित करने वाले प्रचार के खिलाफ छापेमारी और जांच की जा रही है। जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान को किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी।
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कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब होगी कार्रवाई
मुंढे ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘औषधि व प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940’ और अन्य संबंधित कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब सीधे कानूनी और न्यायालयीन कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित भोजन और गुणवत्तापूर्ण दवाएं प्राप्त करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारी है।
पहले दावों की सत्यता जांच ले सेलिब्रिटी
एफडीए का मानना है कि इस कार्रवाई से उपभोक्ताओं को झूठे दावों वाले उत्पादों से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। साथ ही विज्ञापन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और कंपनियों के साथ-साथ ब्रांड एंबेसडरों की जवाबदेही भी तय होगी। विभाग ने सेलिब्रिटी, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और विज्ञापन एजेंसियों से भी अपील की है कि वे किसी उत्पाद का प्रचार करने से पहले उसके दावों की सत्यता की पूरी जांच करें।
