Mumbai ट्रांस हार्बर रूट पर यात्रियों की मुसीबतें, 6 में से सिर्फ एक स्टेशन पर लिफ्ट!
Mumbai वासियों के सफर को आसान बनाने के लिए ट्रांस हार्बर बनाया गया था। लेकिन अब इस रूट पर लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि यहां कुछ सुविधाएं अभी तक नहीं पहुंची है।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुंबई न्यूज
Mumbai News In Hindi: मुंबईकरों को यात्रा को आसान बनाने के लिए बने ट्रांस हार्बर रूट पर यात्रियों को रोजाना कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जहां एक तरफ मुंबई के मध्य रेलवे के एमएमआर क्षेत्र में कुल 222 लिफ्ट और 174 एस्केलेटर है। वहीं ट्रांसहार्बर रूट इन सब सुविधाओं से अछूता रह गया।
दीघा स्टेशन को छोड़ किसी भी स्टेशन पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। छह स्टेशनों वाले इस रूट पर सबवे से ही प्लेटफॉर्म तक पहुंचने की बाध्यता और बुनियादी सुविधाओं की कमी यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। यात्रियों का कहना है कि एस्केलेटर और लिफ्ट जैसी मूलभूत सुविधाएं किसी भी स्टेशन पर उपलब्ध नहीं हैं। केवल दीघा गांव स्टेशन पर ही लिफ्ट की सुविधा है, जबकि अन्य स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए यात्रियों को मजबूरन सबवे के अंदर के सीढ़ियों से चढ़ना और उतरना पड़ता है। जिससे बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
यात्रियों के अनुसार, मेंटेनेंस जरूरतों के हिसाब से नाकाफी
ट्रांस हार्बर रूट पर कुल 6 स्टेशन है। इनमें से दीघा गांव स्टेशन केंद्रीय रेलवे (CR) के पास है, जबकि बाकी पांच स्टेशन ऐरोली, राबले, धनसोली, कोपरखैरने और तुर्भे सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CIDCO) ने बनाए है। इन पांचों का रखरखाव भी सिडको ही करता है, लेकिन यात्रियों के मुताबिक यह मेंटेनेंस जरूरतों के हिसाब से बिल्कुल नाकाफी है, यात्रियों की बढ़ती शिकायतों के बीच अब रेलवे ने इन स्टेशनों के अधिग्रहण की योजना बनाई है। सूत्रों के अनुसार रेलवे इन पांचों स्टेशनों को अपने अधिकार में लेकर यात्रियों की सुविधाओं में सुधार और बेहतर सेवाएं देने की तैयारी कर रहा है, हालांकि इसके बाद भी रेलवे को सिंहको को अधिभार (सरचार्ज) देना जारी रखना होगा।
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यात्रियों की भीड़ का लगातार बढ़ रहा दबाव
- ट्रांस हार्बर लाइन पर रोजाना लाखों यात्री सफर करते हैं। इनमें सबसे ज्यादा भीड़ घनसोली (97,000) और ऐरोली (92,000) स्टेशनों पर दर्ज होती है।
- राबले पर औसतन 60,000, कोपर खैरने पर 66,104, तुर्भे पर 66,385, जबकि दीघा गांव पर करीब 45,000 यात्री रोजाना यात्रा करते हैं।
इस भारी पैदल यात्रा के बावजूद सुविधाओं का स्तर बेहद खराब है। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर पैदल होने के बावजूद स्टेशनों पर बुनियादी इंतजाम नहीं किए गए। - साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, पब्लिक एड्रेस सिस्टम जैसी सुविधाओं का अभाव है। दिल्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष इंतजाम की कमी सबसे बड़ी चिंता है।
