कोस्टल रोड-2 पर नो कॉम्प्रोमाइज! एमएमआरडीए का तर्क, रूट बदलते ही खत्म होगा मंबई से सीधा संपर्क

Thane Coastal Road Phase 2: ठाणे कोस्टल रोड फेज-2 का रूट नहीं बदलेगा। MMRDA के अनुसार, बालकुम से मुलुंड के आनंदनगर तक 7.129 किमी लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा।
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ठाणे कोस्टल रोड फेज-2 (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • MMRDA ने ठाणे कोस्टल रोड फेज-2 को निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

  • दूसरे चरण में बालकुम से मुलुंड पूर्व के आनंदनगर तक सड़क बनाई जाएगी।

  • खंभों के बीच की दूरी 30 मीटर से बढ़ाकर 50 मीटर की गई है।

MMRDA Thane Coastal Road: ठाणे और मुंबई के बीच सफर को आसान बनाने वाले 'ठाणे कोस्टल रोड फेज-2' पर एमएमआरडीए ने स्पष्ट कर दिया है कि परियोजना अपने तय रूट पर ही आगे बढ़ेगी। रूट बदलने से मुंबई से सीधा संपर्क खत्म होने का जोखिम था, जिसके चलते प्राधिकरण ने यह कड़ा रुख अपनाया है।

महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण ने भी कड़ी शर्तों के साथ अपनी सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी है। पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए फ्लेमिंगो अभयारण्य के पास शांत कॉरिडोर बनाया जाएगा। दोनों चरणों के पूरा होने से घोडबंदर रोड का ट्रैफिक घटेगा और नासिक-गुजरात जाने वाले वाहनों को जाममुक्त रफ्तार मिलेगी।

एलिवेटेड रूट की तकनीकी विशेषताएं

प्रस्तावित दूसरा चरण बालकुम से मुलुंड पूर्व के आनंदनगर तक 7.129 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड मार्ग है। यह रास्ता एक तरफ मौजूदा इमारतों और दूसरी तरफ ठाणे खाड़ी के बीच से निकलता है इसलिए मैंग्रोव और पर्यावरण को बचाने का यही एकमात्र विकल्प है।

पर्यावरण और प्रकृति को कम से कम नुकसान पहुंचाने के लिए पूरी सड़क को खंभों पर ऊंचा बनाया जाएगा और खंभों के बीच की दूरी 30 मीटर से बढ़ाकर 50 मीटर कर दी गई है। निर्माण के दौरान प्रभावित होने वाले कुल मैंग्रोव में से करीब 65 फीसदी हिस्से को बिल्कुल नहीं हुआ जाएगा।

पर्यावरण और अभयारण्य की सुरक्षा पर दिया जा रहा जोर

फ्लेमिंगो पक्षियों और अभयारण्य की सुरक्षा के लिए निर्माण कार्य में आवाज कम करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा और पक्षियों के बैठने की जगहों को शांत क्षेत्र घोषित किया जाएगा, स्थानीय मछुआरों की रोजी-रोटी और उनकी नावों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस परियोजना के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट की इजाजत, मैग्रोव सेल से अनापत्ति प्रमाण पत्र और नए पेड़ लगाने की अनिवार्य शर्त रखी गई है। ठाणे मनपा को पर्यावरण की देखरेख के लिए एक अलग सेल बनाने को भी कहा गया है।

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ठाणे और भाईंदर की घटेगी दूरी, 40% काम पूरा हुआ

गायमुख से खारेगांव टोल नाके तक 13.45 किलोमीटर लंबे पहले चरण का 40 फीसदी काम पूरा हो चुका है। छह लेन की यह सड़क घोडबंदर रोड का ट्रैफिक डायवर्ट करेगी और नासिक, गुजरात के साथ उत्तर भारत की तरफ जाने वाले वाहनों को तेज रफ्तार देगी। गायमुख में यह मार्ग प्रस्तावित फाउंटेन होटल टनल से जुड़ेगा जिससे ठाणे और भाईंदर के बीच सीधा और तेज संपर्क बन सकेगा।

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