
दहशतवादियों की तलाश में ‘जहरखुरानी’ का पर्दाफाश (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Mumbai News: मुंबई-ठाणे सहित देशभर में आतंकी संगठनों और उनके नेटवर्क की तलाश एक बार फिर तेज हो गई है। दिल्ली धमाके के बाद शुरू हुई जांच कार्रवाई के तहत गुजरात एटीएस ने कुछ दिन पहले हैदराबाद से डॉक्टर अहमद मोहियुद्दीन सैयद (35) को उसके दो साथियों के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में एक बड़े ‘जहरखुरानी’ (रिसिन आधारित हमले) के षड्यंत्र का खुलासा हुआ है।
डॉ. सैयद पांच वर्ष तक चीन में मेडिकल शिक्षा लेकर भारत लौटा था। इसी दौरान वह आईएसकेपी (इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत) के संपर्क में आया। रसायन और घातक दवाओं की जानकारी होने के कारण आतंकी संगठन ने उसे ‘रिसिन’ जैसे बायोलॉजिकल टॉक्सिन बनाने की जिम्मेदारी दी थी।
भारत लौटने के बाद उसने उत्तर प्रदेश में कुछ कट्टरपंथी युवाओं को ऑनलाइन प्रभावित कर अपने समूह में शामिल किया। इसी नेटवर्क के आधार पर कई वर्षों से रिसिन तैयार करने की योजना चलाई जा रही थी। इसी मामले में यूपी के शामली से आज़ाद सुलेमान शेख और लखीमपुर खीरी से मोहम्मद सुहेल खान को भी गिरफ्तार किया गया है। एटीएस के अनुसार ये तीनों सार्वजनिक स्थानों पर रिसिन को बायोलॉजिकल हथियार की तरह इस्तेमाल करने की फिराक में थे।
‘जहरखुरानी’ का हथियार रिसिन एक अत्यंत घातक बायोलॉजिकल टॉक्सिन है। मंदिरों में प्रसाद, सार्वजनिक स्थानों के पानी या भोजन में मिलाकर बड़े पैमाने पर जानलेवा हमला करने की साजिश कई बार सामने आ चुकी है।
2019 में राज्य एटीएस ने ठाणे के मुंब्रा से तलहा उर्फ अबूबकर हनीफ पोतरीक (24) को गिरफ्तार किया था, जो ऑनलाइन ISIS के संपर्क में आकर विषैले पदार्थ तैयार कर सार्वजनिक जगहों पर फैलाने की तैयारी कर रहा था।
अगस्त 2018 से जनवरी 2019 के बीच उमत मोहम्मदिया ग्रुप द्वारा मुंबई, ठाणे और औरंगाबाद में हमले की योजना बनाई गई थी। गुप्त जानकारी के आधार पर एटीएस ने औरंगाबाद से 4 और मुंब्रा से 5 ऐसे कुल 9 लोगों को 22 जनवरी 2019 को गिरफ्तार कर पूरा मॉड्यूल ध्वस्त किया था। अब गुजरात एटीएस की जांच में फिर से ऐसा ही जहरखुरानी मॉड्यूल उजागर हुआ है।
पाकिस्तान की आईएसआई और कई आतंकी संगठन भारत में कट्टरपंथी विचारधारा वाले युवाओं को इंटरनेट के माध्यम से जोड़कर संगठन में शामिल करते हैं। दिल्ली धमाके के बाद एटीएस ने मुंबई, ठाणे, पुणे और संभाजीनगर से कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। जिनकी ऑनलाइन गतिविधियाँ इन नेटवर्क से जुड़ी पाई गईं।
गृह मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो वर्षों में महाराष्ट्र से 32, जबकि देशभर से 200 से अधिक कट्टर गतिविधियों में शामिल संदिग्धों को ऑनलाइन ट्रैकिंग तकनीक के जरिए पकड़ा गया है।
आईएसआई, जैश-ए-मोहम्मद और ISIS जैसे संगठनों में डॉक्टरों का उपयोग रासायनिक बम और एडवांस विस्फोटक बनाने के लिए किया जाता है। इंजीनियर पारंपरिक बम और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट तैयार करते हैं। उच्च शिक्षित और ‘व्हाइट कॉलर’ युवाओं की भर्ती इसलिए की जाती है ताकि उन पर आसानी से कोई शक न हो। यही इन संगठनों की प्रमुख रणनीति है। भारतीय जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट हुई है।






