टाटा मुंबई मैराथन (सोर्स: सोशल मीडिया)
Tata Mumbai Marathon Economic Impact: मुंबई एक बार फिर दौड़ने के लिए तैयार है। टाटा मुंबई मैराथन (टीएमएम) के 21वें सत्र का आयोजन 18 जनवरी को होने जा रहा है। इस साल मैराथन ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिसमें 69,100 धावक हिस्सा लेकर इतिहास रचने जा रहे हैं।
पूर्ण मैराथन में बढ़ता उत्साह विश्व एथलेटिक्स ‘गोल्ड लेबल’ वाली इस दौड़ में इस बार रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी देखने को मिलेगी। आयोजकों के अनुसार, कुल 69,100 प्रतिभागियों में से 65,400 से अधिक धावक सड़क पर उतरकर प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेंगे, जबकि 3,700 लोग वर्चुअल (ऑनलाइन) माध्यम से इस दौड़ का हिस्सा बनेंगे।
सबसे खास बात यह है कि पहली बार पूर्ण मैराथन श्रेणी में 14,059 धावक प्रतिस्पर्धा करेंगे, जो एक नया कीर्तिमान है। इसके अतिरिक्त, हाफ मैराथन और ओपन 10 किमी दौड़ के प्रति भी लोगों में भारी उत्साह देखा गया है और पंजीकरण की संख्या में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।
यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह मुंबई की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक प्रमुख कारक बन गया है। महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले दो दशकों में इस मैराथन ने लोगों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ शहर की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा सकारात्मक प्रभाव डाला है।
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धावकों के आने से एयरलाइंस, होटल उद्योग और स्थानीय विक्रेताओं को सीधा लाभ मिलता है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में टाटा मुंबई मैराथन ने कुल मिलाकर 1,182.67 करोड़ रुपये का आर्थिक और सामाजिक योगदान दिया है, जो इसके व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
आयोजक ‘प्रोकैम इंटरनेशनल’ के अनुसार, यह आयोजन सामाजिक बदलाव के एक बड़े मंच के रूप में उभरा है। 2025 के सत्र में विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा कुल 53.62 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 27.66 करोड़ रुपये, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए समर्पित किया गया है। यह दर्शाता है कि मैराथन के हर कदम के साथ समाज के वंचित वर्गों की मदद करने का संकल्प भी जुड़ा हुआ है।
टाटा मुंबई मैराथन को एक विशाल उत्सव (कार्निवल) के रूप में देखा जा सकता है, जहाँ हर कदम केवल फिनिश लाइन की ओर नहीं, बल्कि शहर की खुशहाली, बेहतर स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा की ओर बढ़ता है।