वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा, NCP सांसद सुरेश म्हात्रे ने बताया हर भारतीय का गौरव
Vande Mataram Legal Status: केंद्र सरकार ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के समान कानूनी दर्जा दिया है। सांसद सुरेश म्हात्रे ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे मातृभूमि के प्रति सम्मान बताया।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सुरेश म्हात्रे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Suresh Mhatre Statement: भारत सरकार द्वारा वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के समान कानूनी दर्जा देने के ऐतिहासिक निर्णय पर राजनीतिक गलियारों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के सांसद सुरेश म्हात्रे (बाल्या मामा) ने केंद्र सरकार के इस कदम का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम कहना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है और यह हमारी मातृभूमि के प्रति अटूट सम्मान का प्रतीक है।
मातृभूमि का सम्मान सर्वोच्च जिम्मेदारी
मुंबई में पत्रकारों से चर्चा के दौरान सुरेश म्हात्रे ने कहा, वंदे मातरम को सम्मान देना हर भारतीय नागरिक की जिम्मेदारी है। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि उन करोड़ों बलिदानों की गूँज है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान दी। जब हम वंदे मातरम कहते हैं, तो हम वास्तव में अपनी मातृभूमि को नमन कर रहे होते हैं।
उन्होंने अपनी भावनाओं को साझा करते हुए आगे कहा, मैं हमेशा भारत को अपनी मातृभूमि मानता हूँ और गर्व के साथ वंदे मातरम कहता हूँ। इस उद्घोष से जो ऊर्जा और देशभक्ति की भावना जागृत होती है, वह अतुलनीय है।
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कानूनी समानता और इसका महत्व
भारत सरकार के इस नए प्रावधान के बाद अब वंदे मातरम को भी वही प्रोटोकॉल और कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी जो अब तक केवल राष्ट्रगान जन गण मन को प्राप्त थी। इसका अर्थ यह है कि अब आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के गायन या वादन के दौरान भी राष्ट्रगान की तरह ही गरिमा बनाए रखनी होगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से देश में सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता को और मजबूती मिलेगी। विपक्षी खेमे से होने के बावजूद सुरेश म्हात्रे का यह बयान दर्शाता है कि राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के मुद्दे पर सभी दल एकमत हैं। सांसद म्हात्रे ने युवाओं से भी अपील की कि वे देश के गौरवशाली इतिहास और इन प्रतीकों के महत्व को समझें।
