EXPLAINER: मिसिंग लिंक क्यों पड़ा नाम? 27 साल बाद मिला मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का शॉर्टकट, घाट के जाम से मुक्ति

Missing Link Project: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक का 1 मई को उद्घाटन होगा। जानें कैसे यह प्रोजेक्ट खंडाला घाट के खतरनाक मोड़ों को खत्म कर आपकी यात्रा को सुरक्षित और सुपरफास्ट बनाने वाला है।
Mumbai-Pune Expressway Missing Link Project
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर बना मिसिंग लिंक (डिजाइन फोटो)
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Mumbai-Pune Expressway Missing Link Project Details: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर आई है। लंबे समय से चर्चा में रहा ‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट आखिरकार 1 मई 2026 को शुरू होने जा रहा है। महाराष्ट्र दिवस के मौके पर इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इसका उद्घाटन करेंगे। हाल ही में राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने साइट पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया है। इस नई शुरुआत के साथ ही मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पूरी तरह से 'एक्सेस-कंट्रोल हाईवे' बन जाएगा।

क्या है मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट?

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के घाट सेक्शन में एक ऐसा हिस्सा था, जहां ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की समस्या लगातार बनी रहती थी। इसी हिस्से को बायपास करने के लिए मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट बनाया गया। इसमें आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह देश के सबसे एडवांस रोड प्रोजेक्ट्स में शामिल हो गया है।

Mumbai-Pune Expressway Missing Link Project
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर बने मिसिंग लिंक की तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)

मिसिंग लिंक क्यों बनाया गया?

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर यात्रा करते समय खंडाला घाट का जो घुमावदार और ढलान वाला हिस्सा आता है, वहां अक्सर ट्रैफिक जाम लग जाता है, कई बार हादसे होते है और बारिश में पत्थर गिरने का डर रहता है। इस समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने पहाड़ों के बीच से एक 'शॉर्टकट' यानी मिसिंग लिंक बनाया है।

मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट की खास बातें

  • इस प्रोजेक्ट की लंबाई 10.5 किमी है, जिसमें 2 बड़ी सुरंगों का निर्माण किया गया है।
  • टाइगर वैली पर 182 मीटर ऊंचा केबल-स्टे ब्रिज बनाया गया है।
  • इस प्रोजेक्ट के लिए आधुनिक सुरक्षा तकनीक का इस्तेमाल हुआ
  • यह पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड मार्ग है।
  • 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा, बारिश और मुश्किल भौगोलिक हालात के बीच प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
Mumbai-Pune Expressway Missing Link Infographics

यात्रियों को क्या होगा मिसिंग लिंक का फायदा?

इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे पर चलने वाले यात्रियों के लिए सबसे बड़ा फायदा समय की बचत का होगा। इसके अलावा घाट सेक्शन का ट्रैफिक कम होगा, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और यात्रा ज्यादा सुरक्षित और स्मूद होगी। मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे पर चलने वाले यात्रियों के लिए एक फायदा यह भी है कि मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट शुरू होने के बावजूद टोल में कोई नई बढ़ोतरी नहीं होगी। इससे चार पहिया वाहनों और बसों से यात्रियों के आने-जाने की इजाजत है।

मिसिंग लिंक क्यों पड़ा इसका नाम?

1995 में, BJP-शिवसेना गठबंधन की महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई से पुणे तक देश का पहला एक्सप्रेसवे बनाने का फैसला किया। हालांकि, पुणे के खंडाला घाट सेक्शन के मुश्किल भौगोलिक इलाके की वजह से एक खास हिस्सा अधूरा रह गया। नतीजतन, ट्रैफिक को पुराने NH-4 (अब NH-48) पर मोड़ दिया गया। यही अधूरा हिस्सा बाद में मिसिंग लिंक के नाम से जाना जाने लगा।

Mumbai-Pune Expressway Missing Link Project
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर बने मिसिंग लिंक की तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)

क्यों 27 साल तक अटका रहा Missing Link Project?

मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट की शुरुआत आज से 27 साल पहले 1999 में हुई थी, लेकिन भौगोलिक चुनौतियों और प्रशासनिक कारणों से यह लंबे समय तक अटका रहा। साल 2014 में देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने और 2015 में उनके नेतृत्व में इसे फिर से गति मिली और आखिरकार 2026 में यह पूरा होने जा रहा है।

क्या पूरी तरह खत्म होगा Mumbai-Pune Expressway का ट्रैफिक?

मिसिंग लिंक से यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बढ़ती गाड़ियों की संख्या के चलते ट्रैफिक पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है। मिसिंग लिंक सिर्फ एक सड़क प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा अपग्रेड है। अब देखना होगा कि यह प्रोजेक्ट यात्रियों के लिए कितना गेमचेंजर साबित होता है।

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