पीपीपी मॉडल पर एसटी की जमीनों का विकास, यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं, स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
MSRTC Land Development: महाराष्ट्र सरकार ने एसटी की खाली जमीनों को PPP मॉडल पर विकसित करने का निर्णय लिया है, जिससे बस स्टैंडों का आधुनिकीकरण होगा, यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आंचल लोखंडे
प्रताप सरनाईक (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra Bus Stand Modernization: महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एसटी) की अतिरिक्त और खाली पड़ी जमीनों का बेहतर उपयोग कर आय बढ़ाने, यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। यह जानकारी राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दी।
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के पास राज्यभर में बस डिपो और बस स्टैंड परिसरों में लगभग 1500 हेक्टेयर से अधिक जमीन उपलब्ध है। इन जमीनों का योजनाबद्ध विकास कर आय बढ़ाने के लिए सरकार ने इन्हें सरकारी निजी कंपनी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर निजी डेवलपर्स को देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। राज्य विधान परिषद में जानकारी देते हुए परिवहन मंत्री ने कहा कि निगम की जमीनों को 98 वर्ष के लीज समझौते के आधार पर देकर उनका पुनर्विकास किया जाएगा।
2360 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध
राज्य में वर्तमान में एसटी के 251 डिपो और 581 बस स्टेशन कार्यरत हैं। वहीं लगभग 482 स्थानों पर करीब 2360 हेक्टेयर जमीन विकास के लिए उपलब्ध बताई गई है। इससे पहले वर्ष 2017 में इन जमीनों के विकास के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिलने के कारण वह आगे नहीं बढ़ सकी थी। बाद में उच्चाधिकार समिति की सिफारिशों के आधार पर संशोधित नीति तैयार की गई।
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पहले चरण में मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में एसटी की जमीनों का विकास किया जाएगा। इस योजना के तहत बस स्टैंडों का आधुनिकीकरण, व्यावसायिक परिसर, कार्यालय भवन तथा यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
राज्यातील एसटी बस आगरांना बस पोर्ट म्हणून विकसित करण्यात येणार आहे. त्याअनुषंगाने विधीमंडळ सदस्यांकडून प्रश्न उपस्थित करण्यात आला. या प्रश्नांचे सविस्तर उत्तर सभागृहासमोर मांडले. राज्यातील एसटी बस आगारांचा विकास करून बस पोर्ट निर्माण करण्याची योजना एसटी महामंडळाच्या माध्यमातून… pic.twitter.com/HdaGoKw63u — Pratap Baburao Sarnaik (@PratapSarnaik) March 12, 2026
लीज अवधि 60 वर्ष
सरकार ने इस परियोजना के लिए लीज अवधि 30 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने का निर्णय लिया है, जबकि व्यावसायिक विकास परियोजनाओं के लिए 49+49 वर्ष यानी कुल 98 वर्ष का लीज प्रावधान रखा गया है। इससे निवेशकों को प्रोत्साहन मिलेगा और एसटी निगम को दीर्घकालीन आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। सरकार ने परियोजना के लिए विशेषज्ञ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स का पैनल भी तैयार किया है। उनके मार्गदर्शन में विभिन्न स्थानों को ‘ए’, ‘बी’ और ‘सी’ श्रेणी में बांटकर क्लस्टर पैकेज तैयार किए जा रहे हैं।
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पहले चरण में 72 परियोजनाओं के माध्यम से 216 स्थानों का विकास पीपीपी मॉडल पर करने का प्रस्ताव है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि इन परियोजनाओं के तहत बस स्टैंड और डिपो परिसरों में आधुनिक इमारतें, व्यावसायिक दुकानें और सेवा केंद्र विकसित किए जाएंगे। इससे एसटी निगम को स्थायी आय का स्रोत मिलेगा, यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं मिलेंगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
