सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजने की घटना पर महाराष्ट्र में सियासी घमासान, विपक्ष हुआ हमलावर
Sonam Wangchuk Maharashtra Politics: सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजने के विरोध में शरद पवार, आदित्य ठाकरे, संजय राउत और प्रियंका चतुर्वेदी समेत विपक्ष केंद्र पर हमलावर है।
- Written By: अनिल सिंह
शरद पवार, संजय राउत, प्रियंका चतुर्वेदी (फोटो क्रेडिट-X)
Sonam Wangchuk Detention: लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा कथित तौर पर जबरन अस्पताल भेजने की घटना के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भारी भूचाल आ गया है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर महाविकास अघाड़ी (MVA) सहित पूरे विपक्ष ने एकजुट होकर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) के युवा नेता आदित्य ठाकरे, सांसद संजय राउत और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे दिग्गज नेताओं ने इस पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। विपक्ष का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे एक सम्मानित नागरिक की आवाज को सरकारी मशीनरी के दम पर दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
Instead of sending a minister to have him end his fast they sent the Delhi Police, people won’t forget. However, Sonam ji we need you to live to fight another day. And yes maybe trolled for it, will say it nevertheless, CJP cant make Wangchuk the sacrificial lamb for their… — Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) July 18, 2026
सम्बंधित ख़बरें
चोर-उचक्कों की तरह उठा ले गई पुलिस.. सोनम वांगचुक को लेकर एक्शन पर बरसा विपक्ष, सरकार पर लगाए तानाशाही के आरोप
नागपुर में शिवसेना (उबाठा) के राम रक्षा पाठ से गरमाया महाराष्ट्र का सियासी पारा; फडणवीस और भागवत को भी न्योता
सफेद चादर से ढका मंच, डॉक्टर बनकर घुसी दिल्ली पुलिस, फिर… देखें जंतर-मंतर पर बवाल का पूरा VIDEO
जयंत पाटिल के NDA में जाने की अटकलों पर सतेज पाटिल बोले- 2029 में बदलेगी महाराष्ट्र की राजनीति
शरद पवार और आदित्य ठाकरे ने जताया कड़ा विरोध
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक शिक्षा अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण सत्याग्रह कर रहे हैं। उन्हें बलपूर्वक अस्पताल में भर्ती कराना लोकतांत्रिक मूल्यों की सरेआम धज्जियां उड़ाने जैसा है। पवार ने सरकार को चेतावनी दी कि जनता के अधिकारों के लिए उठने वाली आवाजों को जेल या अस्पताल के दम पर कुचला नहीं जा सकता। आखिरकार वो संबंधित मंत्री का इस्तीफा ही तो मांग रहे हैं। स्कारकार को जवाबदेही तय करनी होगी।
ये भी पढ़ें- NEET टॉपर श्रावणी कुडाले सुनेत्रा पवार ने किया वीडियो कॉल, बारामती की बेटी को दी बधाई
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने केंद्र सरकार की इस कार्रवाई को बेहद शर्मनाक बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जो व्यक्ति देश के छात्रों के अधिकार की सुरक्षा के लिए लड़ रहा है, उसके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। ठाकरे ने कहा कि वर्तमान सरकार असहमति की हर आवाज से डरती है और यही कारण है कि वांगचुक को उनके अनशन के दौरान परेशान किया जा रहा है।
यह पूरी तरह अघोषित आपातकाल है
शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता और सांसद संजय राउत ने इस मामले को लेकर मोदी सरकार पर बेहद आक्रामक हमला बोला है। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने कहा, “देश में इस समय पूरी तरह से अघोषित आपातकाल का माहौल बना हुआ है। सोनम वांगचुक कोई आतंकवादी या अपराधी नहीं हैं, वे एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और वैज्ञानिक हैं। उन्हें जबरन हिरासत में रखना और अस्पताल भेजना यह दर्शाता है कि यह सरकार कितनी तानाशाह हो चुकी है।”
इस बीच, राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चतुर्वेदी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर भारतीय नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजना उनकी शारीरिक स्थिति की चिंता में नहीं, बल्कि उनके आंदोलन को कमजोर करने की एक सोची-समझी प्रशासनिक साजिश है। एक्स पर उन्होंने लिखा, उनका अनशन खत्म करवाने के लिए किसी मंत्री को भेजने के बजाय उन्होंने दिल्ली पुलिस को भेजा, लोग भूलेंगे नहीं। लेकिन, सोनम जी, हमें एक और दिन लड़ने के लिए आपकी ज़रूरत है। और हाँ, शायद इसके लिए ट्रोल भी किया जाए, फिर भी कहूँगा, CJP वांगचुक को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए बलि का बकरा नहीं बना सकते।
