एक साल बीत गया, पहलगाम नरसंहार के असली साजिशकर्ता को मिली सजा? शिवसेना यूबीटी ने पूछा सवाल
Pahalgam Attack Anniversary: शिवसेना यूबीटी ने 'सामना' के जरिए पहलगाम हमले की जांच और 'ऑपरेशन सिंदूर' पर उठाए सवाल। ट्रंप के हस्तक्षेप पर निशाना। पूछा- असली साजिशकर्ता को मिली सजा?
- Written By: अनिल सिंह
Uddhav Thackeray on Pahalgam Attack (फोटो क्रेडिट-X)
Uddhav Thackeray on Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की पहली बरसी पर शिवसेना (UBT) ने केंद्र सरकार की नीतियों और सुरक्षा व्यवस्था पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में इस हमले को देश के लिए एक ऐसा ‘नासूर’ बताया गया है, जो एक साल बीत जाने के बाद भी नहीं भरा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने पूछा है कि क्या इस नरसंहार के असली साजिशकर्ताओं को सजा मिली या भारत की न्याय की मांग अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के शोर में दब गई?
संपादकीय में 2019 के पुलवामा हमले के बाद इसे क्षेत्र का सबसे बड़ा हमला करार देते हुए सुरक्षा व्यवस्था में हुई गंभीर चूक की ओर इशारा किया गया है। लेख में सवाल किया गया कि आतंकवादी सीमा से करीब 200 किलोमीटर का सफर तय कर पहलगाम तक कैसे पहुंचे और हमले के बाद सुरक्षित जंगलों में कैसे ओझल हो गए?
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अमेरिकी हस्तक्षेप
पहलगाम हमले के जवाब में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसमें सीमा पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि, ‘सामना’ ने इस अभियान के अचानक रुकने पर सवाल उठाए हैं। संपादकीय के अनुसार, जब भारतीय सेना निर्णायक स्थिति में थी, तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप और व्यापार प्रतिबंधों की धमकी के बाद युद्धविराम स्वीकार कर लिया गया। शिवसेना का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने का एक बड़ा मौका गंवा दिया गया।
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कूटनीतिक मोर्चे पर विफल रहने का आरोप
संपादकीय में भारत की वर्तमान वैश्विक स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई है। लेख में दावा किया गया है कि एक तरफ भारत जांच के लिए दुनिया भर में प्रतिनिधिमंडल भेज रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर का व्हाइट हाउस में भव्य स्वागत किया। शिवसेना ने तंज कसते हुए कहा कि जिस देश पर पहलगाम हमले का आरोप है, उसे ट्रंप ने ईरान-इजरायल संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका सौंप दी, जबकि भारत पर भारी व्यापारिक शुल्क (Tariffs) थोप दिए गए।
अनसुलझे सवाल और जनता का दर्द
शिवसेना (UBT) ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों को घेरते हुए कहा कि देश के भीतर इस हमले की जांच अब ठहरती हुई नजर आ रही है। संपादकीय का निष्कर्ष है कि कूटनीतिक जीत के दावों के बीच पहलगाम के शहीदों के परिवार आज भी असली गुनहगारों को सजा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। क्या वास्तव में पाकिस्तान को अलग-थलग किया जा सका है या भारत केवल घरेलू स्तर पर कड़े बयानों तक सीमित रह गया है, यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।
