Shiv Sena UBT On Marathi School प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
Marathi Schools Closing in Maharashtra: महाराष्ट्र की राजनीति में भाषा और अस्मिता का मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है। शिवसेना (UBT) ने सत्तारूढ़ महायुति सरकार पर बेहद गंभीर और तीखा आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में मराठी भाषा का ‘गला घोंटा’ जा रहा है। उद्धव ठाकरे गुट के अनुसार, मौजूदा सरकार की नीतियां जानबूझकर मराठी माध्यम के स्कूलों को बंद करने या उन्हें कमजोर करने की दिशा में काम कर रही हैं। शिवसेना (UBT) ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से सरकार को घेरते हुए इसे महाराष्ट्र की संस्कृति और पहचान पर हमला करार दिया है।
पार्टी का आरोप है कि ‘मराठी मानुस’ के अधिकारों की बात करने वाली सरकार के राज में ही हजारों मराठी स्कूल बंदी की कगार पर हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार का ध्यान केवल बड़े निजी अंग्रेजी स्कूलों को बढ़ावा देने पर है, जबकि ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा का मुख्य आधार रहे सरकारी मराठी स्कूलों को उपेक्षित छोड़ दिया गया है।
मराठमोळ्या महाराष्ट्रात मराठीचा गळा घोटला जातोय… मराठी शाळा बंद करण्याचं महायुती सरकारचं धोरण ! pic.twitter.com/feVokctVTw — ShivSena – शिवसेना Uddhav Balasaheb Thackeray (@ShivSenaUBT_) February 22, 2026
शिवसेना (UBT) ने आधिकारिक आंकड़ों और स्थानीय रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के विभिन्न जिलों में सैकड़ों मराठी स्कूलों को कम उपस्थिति का बहाना बनाकर बंद कर दिया गया है। पार्टी का तर्क है कि यदि सरकार इन स्कूलों में बेहतर बुनियादी ढांचा, शिक्षक और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराती, तो छात्र संख्या में कभी गिरावट नहीं आती। विपक्ष ने इसे “सांस्कृतिक विनाश” की संज्ञा देते हुए कहा है कि मराठी भाषी राज्य में ही मराठी शिक्षा का अस्तित्व खतरे में डालना निंदनीय है।
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महायुति सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘क्लस्टर स्कूल’ (Cluster Schools) की योजना पर भी शिवसेना (UBT) ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि छोटे स्कूलों को बड़े क्लस्टर में मिलाने की आड़ में सरकार वास्तव में दूर-दराज के गांवों के स्कूलों को बंद कर रही है। इससे गरीब बच्चों, विशेषकर लड़कियों के लिए शिक्षा तक पहुँच कठिन हो जाएगी। पार्टी ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब सरकार करोड़ों रुपये विज्ञापनों और राजनीतिक कार्यक्रमों पर खर्च कर सकती है, तो मराठी स्कूलों के संरक्षण के लिए पर्याप्त बजट क्यों नहीं आवंटित किया जाता?
यह विवाद तब और गहरा गया है जब आगामी विधानसभा सत्र में शिक्षा बजट पर चर्चा होनी है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया है कि वे इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महाराष्ट्र की औद्योगिक और सांस्कृतिक शक्ति को कमजोर करने के साथ-साथ अब उसकी भाषाई नींव पर भी प्रहार कर रही है। दूसरी ओर, महायुति सरकार के मंत्रियों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि वे केवल उन स्कूलों का पुनर्गठन कर रहे हैं जहाँ गुणवत्ता और छात्र संख्या बेहद कम है, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।