Maharashtra Assembly Budget Session (फोटो क्रेडिट-X)
MVA vs Mahayuti: महाराष्ट्र की राजनीति में कल यानी 23 फरवरी 2026 से शुरू होने वाला विधानसभा का बजट सत्र बेहद तनावपूर्ण और हंगामेदार रहने के आसार हैं। महा विकास आघाड़ी (MVA) ने सत्र की पूर्व संध्या पर ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष ने न केवल मुख्यमंत्री की पारंपरिक ‘चाय बैठक’ का बहिष्कार किया, बल्कि भ्रष्टाचार, कर्ज संकट, किसान आत्महत्या और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए एक लंबी चार्जशीट पेश की है।
विपक्ष के इस आक्रामक रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी दिनों में सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़पें देखने को मिलेंगी। एमवीए ने सरकार पर राज्य को आर्थिक दिवालियेपन की ओर धकेलने और गंभीर अपराधों पर पर्दा डालने का आरोप लगाया है।
राज्याच्या अर्थसंकल्पीय अधिवेशनाच्या पार्श्वभुमीवर आज महाविकास आघाडीतील प्रमुख नेत्यांची बैठक मुंबईत पार पडली. या बैठकीला काँग्रेसचे विधानसभेतील गटनेते श्री.विजय वडेट्टीवार, विधानपरिषदेतील काँग्रेस पक्षाचे गटनेते श्री.सतेज पाटील, शिवसेना उद्धव बाळासाहेब ठाकरे पक्षाचे उपनेते… pic.twitter.com/jt31I2gCAI — Maharashtra Congress (@INCMaharashtra) February 22, 2026
एमवीए ने मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित ‘चाय बैठक’ का बहिष्कार करते हुए इसे लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान बताया है। हालांकि, इस बहिष्कार के बीच विपक्षी गठबंधन के भीतर की दरार भी चर्चा में है। शरद पवार की एनसीपी के नेताओं की अनुपस्थिति को ‘कम्युनिकेशन गैप’ कहा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा और विधान परिषद की सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और उद्धव गुट (UBT) अब शरद पवार से दूरी बना रहे हैं। कांग्रेस राज्यसभा की सीट के बदले यूबीटी को विधान परिषद में समर्थन देने की रणनीति पर काम कर रही है।
ये भी पढ़ें- आदित्य ठाकरे का राहुल नार्वेकर पर बड़ा हमला: ‘अलीबाग में लड़ सकते हैं, पर विधानसभा नहीं संभाल पा रहे अध्यक्ष’
विपक्ष ने दिवंगत नेता अजित पवार के विमान हादसे की उच्च स्तरीय जांच की मांग को प्रमुखता से उठाया है। एमवीए का आरोप है कि सरकार इस मामले में तथ्यों को छिपा रही है। इसके साथ ही, यवतमाल जिले में पिछले एक महीने में हुई 22 किसानों की आत्महत्या का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष ने सरकार को ‘किसान विरोधी’ करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन अन्नदाता की स्थिति बदतर होती जा रही है।
महाराष्ट्र के बढ़ते कर्ज को लेकर एमवीए ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का दावा है कि सरकार ने राज्य को 92,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर्ज के जाल में फँसा दिया है। ‘लाडकी बहिन’ जैसी योजनाओं पर सवाल उठाते हुए विपक्ष ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में राज्य की वित्तीय स्थिति चरमरा गई है और अन्य महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती की जा रही है। इसके अलावा, दावोस दौरे पर हुए खर्च और उससे मिले वास्तविक निवेश पर ‘श्वेत पत्र’ जारी करने की मांग भी की गई है।
राज्य में कानून व्यवस्था और नशीले पदार्थों के बढ़ते कारोबार को लेकर विपक्ष बेहद आक्रामक है। एमवीए ने दावा किया कि महाराष्ट्र में 1.57 लाख से अधिक महिलाएं और लड़कियां लापता हैं, जिनमें एक आदिवासी महिला सरपंच का मामला भी शामिल है। विपक्ष ने नागपुर और अन्य शहरों में बढ़ते नशाखोरी को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही, एसीबी (ACB) की हालिया कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए विपक्षी नेताओं ने इसे सरकार की डराने-धमकाने वाली राजनीति करार दिया है।