विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों की नौकरी खतरे में
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्ववाली राज्य सरकार ने उन स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों की सरकारी नौकरियों को खत्म करने का फैसला लिया है, जिन स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार और निर्धारित प्रक्रिया से नियुक्त किए जाने की बजाय सीधे नियुक्त किया गया है।
- Written By: आकाश मसने
एकनाथ शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया)
मुंबई: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है। महायुति सरकार लाडली बहन योजना को जोर-शोर से प्रचार कर रही है। महाराष्ट्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए योजनादूत उपक्रम की शुरूआत की है। सरकार इन योजनाओं के जरिए मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है। वहीं विपक्ष भी एक बाद एक नए-नए वादे कर रहे हैं। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने एक ऐसा निर्णय लिया है जिससे महायुति सरकार की फजीहत हो सकती है।
विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र की महायुति सरकार एक तरफ तमाम वर्गों को साथ जोड़ने के लिए नई-नई योजनाएं ला रही है तो वहीं दूसरी तरफ सरकार के एक निर्णय के कारण स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों की सरकारी नौकरी खतरे में पड़ने की आशंका उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में जारी किए गए एक सरकारी जीआर के अनुसार, निर्धारित पद्धति से नियुक्ति के बजाय सीधी नियुक्ति वाले कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।
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मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्ववाली राज्य सरकार ने उन स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों की सरकारी नौकरियों को खत्म करने का फैसला लिया है, जिन स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार और निर्धारित प्रक्रिया से नियुक्त किए जाने की बजाय सीधे नियुक्त किया गया है। सरकार ने उनकी सेवाओं को समाप्त करने के आदेश जारी कर दिया है।
कलेक्टरों को दिए गए निर्देश
सरकार के इस फैसले से स्वतंत्रता के बच्चों में खलबली मच गई है। क्योंकि राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि इस फैसले को तत्काल लागू करें और कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट दें। इस संबंध में सरकार का फैसला महाराष्ट्र सरकार की वेबसाइट www.maharashtra.gov.in पर उपलब्ध कराया गया है।
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प्रभावित होंगे 3000 कर्मचारी
इस फैसले से महाराष्ट्र के स्वतंत्रता सेनानियों के करीब 3000 बच्चों की नौकरियां खत्म होनी तय हो गई है। विधानसभा चुनाव से पहले लिए गए राज्य सरकार के इस फैसले से बड़ा विवाद खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है। ‘जय भगवान महासंघ’ ने फैसले का विरोध करने की घोषणा की है। संघ से जुड़े बालासाहेब सनप ने सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
